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सिंहस्थ से पहले उज्जैन में दिखने लगा कुंभ जैसा आध्यात्मिक वातावरण, पंच धूनी तप में लीन हुए टाटम्बरी सरकार; धधकते कंडों के बीच कर रहे तप
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में होने वाले अगले सिंहस्थ कुंभ में अभी करीब दो साल का समय बाकी है, लेकिन शहर और उसके आसपास का धार्मिक वातावरण अभी से कुंभ जैसी अनुभूति कराने लगा है। साधु-संतों की मौजूदगी, धार्मिक अनुष्ठान और तप साधना के चलते श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
इसी क्रम में देश के प्रसिद्ध संत टाटम्बरी सरकार यानी श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर रामदास जी त्यागी अपने करीब 20 संतों के साथ उज्जैन पहुंचे हैं। इन दिनों उनकी कठिन तपस्या लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
धधकते कंडों के बीच कर रहे तप
निनोरा क्षेत्र में आयोजित नर्मदा पुराण कथा में शामिल होने आए संत खुले आसमान के नीचे तपस्या कर रहे हैं। संतों के सिर पर रखे पात्रों में कंडे जल रहे हैं और चारों ओर धूनी सजी हुई है। तपती गर्मी के बावजूद संत घंटों तक जाप और साधना में लीन रहते हैं।
करीब 40 डिग्री तापमान के बीच जहां आम लोग दोपहर में बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं संत पंच धूनी के बीच बैठकर कठिन साधना कर रहे हैं। यह दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
संतों के ठहराव स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है। लोग संतों के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे सिंहस्थ से पहले आध्यात्मिक वातावरण का संकेत मान रहे हैं।
धार्मिक आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं का कहना है कि उज्जैन में संतों की बढ़ती मौजूदगी से शहर का माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में दिखाई देने लगा है।
निनोरा में चल रही नर्मदा पुराण कथा
निनोरा निवासी सोनू शर्मा के खेत पर नर्मदा पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। टाटम्बरी सरकार और उनके साथ आए संत इसी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं।
आयोजकों के अनुसार, कथा 3 मई से शुरू हुई थी और इसका समापन शनिवार को होगा। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी रखा गया है, जिसमें बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
सुबह 3 बजे शुरू हो जाता है अनुष्ठान
ध्रुव दास त्यागी ने बताया कि सभी संत प्रतिदिन तड़के करीब 3 बजे उठ जाते हैं। पूजा-पाठ और दैनिक क्रियाओं के बाद धूनी रमाकर साधना शुरू की जाती है।
उन्होंने बताया कि यह विशेष अनुष्ठान संसार के कल्याण की भावना से किया जा रहा है। यह क्रम लगातार चार महीने तक चलेगा और इसका समापन गंगा दशहरा पर होगा।
1992 से निनोरा आते रहे हैं टाटम्बरी सरकार
आयोजक सोनू शर्मा के मुताबिक, संत टाटम्बरी सरकार वर्ष 1992 से लगातार निनोरा में धार्मिक आयोजनों में भाग लेते आ रहे हैं। इस बार भी वे नर्मदा पुराण कथा में शामिल होने पहुंचे हैं।
उनकी तपस्या और संतों की साधना को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंच रहे हैं।
सबसे कम उम्र के महामंडलेश्वर भी पहुंचे
इस धार्मिक आयोजन में महामंडलेश्वर सियाराम दास महाराज भी पहुंचे हैं। प्रयागराज कुंभ में उन्हें महज 18 वर्ष की उम्र में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी। इसके बाद उनका नाम महामंडलेश्वर सियाराम दास रखा गया।
बताया जाता है कि उन्होंने 13 वर्ष की आयु में ही घर-परिवार छोड़कर संन्यास जीवन अपना लिया था।
टाटम्बरी बाबा ने बनाया उत्तराधिकारी
महामंडलेश्वर सियाराम दास मूल रूप से मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं। किशोरावस्था में ही वे दिगंबर अनी अखाड़े के श्रीमहंत सियाराम दास महाराज टाटम्बरी बाबा के शिष्य बन गए थे।
सनातन परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा का ज्ञान कम उम्र में प्राप्त करने वाले सियाराम दास को टाटम्बरी बाबा ने अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया है।
महज 19 वर्ष की उम्र में लंबी जटाओं और साधु वेश में मौजूद सियाराम दास श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण बने हुए हैं।