- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार: उज्जैन में घाटों पर उतरी प्रशासनिक टीम, भीड़ प्रबंधन पर सबसे ज्यादा जोर
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सिंहस्थ 2028 की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार: उज्जैन में घाटों पर उतरी प्रशासनिक टीम, भीड़ प्रबंधन पर सबसे ज्यादा जोर
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुम्भ 2028 को लेकर प्रशासन ने तैयारियों को अब जमीनी स्तर पर गति देना शुरू कर दिया है। आयोजन में भले अभी दो साल का समय शेष हो, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या, स्नान व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय नजर आ रहा है।
शनिवार सुबह शहर के घाट क्षेत्रों में इसी तैयारी की एक बड़ी तस्वीर देखने को मिली, जब मेला अधिकारी एवं संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा समेत करीब 30 अधिकारियों की टीम ने क्षिप्रा नदी के घाटों का विस्तृत निरीक्षण किया।
सुबह 6 बजे शुरू हुआ निरीक्षण, पैदल तय किया लंबा मार्ग
अधिकारियों का दल सुबह करीब 6 बजे शनि मंदिर क्षेत्र से निकला। वहां से टीम पैदल चलते हुए वाकणकर ब्रिज तक पहुंची। इस दौरान लगभग 6 किलोमीटर का पैदल निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण केवल एक सीमित क्षेत्र तक नहीं था, बल्कि करीब 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र की व्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने अलग-अलग घाटों पर रुककर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और मौके पर जरूरी सुझाव भी दिए।
नए घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर बनी रणनीति
सिंहस्थ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षित स्नान व्यवस्था को माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विशेष रूप से नवनिर्मित घाटों की स्थिति देखी।
इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु घाटों तक बिना अव्यवस्था के कैसे पहुंच सकेंगे। इसके अलावा स्नान के बाद सुरक्षित निकासी और भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने की योजना पर भी विचार किया गया।
पार्किंग से घाट तक के रूट पर फोकस
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्किंग स्थलों से घाट तक पहुंचने वाले मार्गों का भी अध्ययन किया। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि श्रद्धालुओं को लंबी दूरी या अव्यवस्थित रास्तों का सामना न करना पड़े।
सड़क कनेक्टिविटी, पैदल मार्ग, निकासी व्यवस्था और भीड़ के दबाव वाले संभावित क्षेत्रों की पहचान को लेकर अधिकारियों ने मौके पर ही मंथन किया।
हर 200 मीटर पर एंट्री और एग्जिट की तैयारी
संभागायुक्त एवं मेला अधिकारी आशीष सिंह ने निरीक्षण के बाद बताया कि घाट निर्माण का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता केवल घाट बनाना नहीं बल्कि वहां तक श्रद्धालुओं की सुगम पहुंच सुनिश्चित करना भी है।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लगभग हर 200 मीटर की दूरी पर एंट्री और एग्जिट पॉइंट विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि भीड़ एक जगह इकट्ठी न हो और लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहे।
रोजाना होगा सुबह निरीक्षण
मेला अधिकारी ने बताया कि अब घाट क्षेत्रों का निरीक्षण प्रतिदिन सुबह 6 बजे किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण और व्यवस्थाओं से जुड़ा हर काम तय समयसीमा में पूरा हो सके।
अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की स्थिति न बने।
चेंजिंग रूम, लाइटिंग और बुनियादी सुविधाओं पर भी जोर
प्रशासन केवल स्नान घाटों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी समान रूप से काम किया जा रहा है।
घाटों तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था, चेंजिंग रूम और अन्य मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने की योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
पांच करोड़ श्रद्धालुओं की संभावना को देखते हुए तैयारी
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान एक ही दिन में लगभग पांच करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना को ध्यान में रखते हुए पूरी रणनीति तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पार्किंग व्यवस्था से लेकर घाट तक पहुंचने, स्नान के बाद सुरक्षित निकासी और भीड़ नियंत्रण तक हर बिंदु पर प्रशासन गंभीरता से कार्य कर रहा है।
प्रशासन का फोकस इस बार ऐसी व्यवस्थाएं तैयार करने पर है, जिससे श्रद्धालुओं को कम से कम परेशानी हो और बड़े स्तर पर होने वाले आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।