- उज्जैन महाकाल मंदिर में अलौकिक सुबह: चांदी के पट खुले, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद भस्म चढ़ी, गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
- महाकुंभ जैसा होगा सिंहस्थ 2028, पार्किंग स्थलों का हुआ निरीक्षण: अधिकारियों के जारी किए निर्देश, कहा - घाट तक आसान पहुंच पर जोर
- महाकाल मंदिर पहुंचे मिलिंद सोमन और नितीश राणा: भस्म आरती में हुए शामिल, 2 घंटे नंदी हॉल में किया जाप
- तड़के महाकाल के कान में स्वस्ति वाचन, फिर खुला चांदी का पट! भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में दर्शन
महाकाल-रुद्रसागर प्रोजेक्ट:ब्रह्मा बने सारथी, सूर्य-चंद्र रथ के पहिए
भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध कर संसार को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। महाभारत और अन्य धर्मग्रंथों में शिवजी की यह कथा काफी प्रचलित है। त्रिपुरासुर के वध के लिए सभी देवी-देवताओं ने सहयोग किया था। जिस रथ पर सवार होकर शिव ने त्रिपुरासुर को मारा उस रथ के सारथी ब्रह्माजी बने, सूर्य और चंद्र रथ के पहिए बन गए। चारो वेद रथ के चार घोड़ बन गए। धनुष की डोर वासुकी नाग…
और पढ़े..









