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जिससे अनबन हो उससे क्षमा मांगो, जो क्षमा मांगते वे आराधक, यही पर्युषण की सच्चाई
हमारी किसी भी बात, व्यापार कार्य या व्यवहार को लेकर किसी से अनबन है तो बड़ा दिल रखकर सबसे पहले उससे क्षमा याचना करना चाहिए। पर्युषण पर्व का वास्तविक कर्त्तव्य यही है, यदि हम ऐसा नहीं करते तो वह मिथ्यातत्व कहलाएगा। जो क्षमा मांगते है वे आराधक हैं और जो नहीं मांगते वे विराधक। यह उद्गार ऋषभदेव छगनीराम पेढ़ी मंदिर खाराकुआं पर साध्वी हेमेंद्र श्रीजी मसा की शिष्या साध्वी चारूदर्शा श्रीजी मसा ने पर्युषण के…
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