पीएम की अपील और सीएम के निर्देश के बाद उज्जैन प्रशासन की नई पहल, अब एक ही वाहन से सिंहस्थ निरीक्षण पर निकल रहे अधिकारी

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने ईंधन बचत और सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर एक नई व्यवस्था लागू की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण संबंधी अपील और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अब निरीक्षण दौरों के तरीके में बदलाव किया है। बुधवार से सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अलग-अलग वाहनों की जगह सभी अधिकारी एक ही वाहन से मौके पर पहुंच रहे हैं।

बुधवार सुबह सिंहस्थ व्यवस्थाओं का जायजा लेने निकली प्रशासनिक टीम में संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, यूडीए सीईओ संदीप सोनी, तहसीलदार आलोक चोरे, जल संसाधन विभाग के ईई मयंक सिंह, योगेश बिरला, अवनेंद्र सिंह और ट्रैफिक डीएसपी दिलीप सिंह परिहार सहित करीब 15 अधिकारी शामिल रहे। सभी अधिकारी एक साथ अर्बेनिया वाहन में बैठकर सिंहस्थ क्षेत्र के निरीक्षण पर पहुंचे।

अधिकारियों ने 29 किलोमीटर लंबे उस घाट क्षेत्र का दौरा किया, जहां सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए विभिन्न निर्माण और विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से प्रशासनिक अमला लगातार सुबह के समय मैदान में उतरकर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है।

पहले 15 अलग-अलग गाड़ियों से पहुंचते थे अधिकारी

अब तक निरीक्षण के दौरान लगभग हर विभाग के अधिकारी अपनी अलग-अलग गाड़ियों से मौके पर पहुंचते थे। इनमें कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल रहते थे। रोजाना करीब 15 वाहन निरीक्षण दल के साथ चलते थे।

अधिकारियों का यह काफिला लगभग 16 किलोमीटर का निरीक्षण मार्ग तय करता था। इसके अलावा अधिकारी अपने सरकारी निवास या कार्यालय से घाट क्षेत्र तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त 5 से 7 किलोमीटर की यात्रा भी करते थे। अधिकांश अधिकारी इनोवा वाहनों का उपयोग कर रहे थे, जिनका औसत माइलेज लगभग 10 किलोमीटर प्रति लीटर माना गया है।

निरीक्षण के दौरान वाहनों के एसी लगातार चालू रहने के कारण ईंधन की खपत और बढ़ जाती थी। प्रशासनिक गणना के अनुसार, प्रत्येक वाहन पर करीब 4 लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च हो रहा था। लगभग 450 रुपए प्रति वाहन के हिसाब से रोजाना करीब 6750 रुपए का खर्च सिर्फ ईंधन पर हो रहा था।

ट्रैवलर बस से कम हुआ खर्च

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकारियों ने ट्रैवलर बस से सामूहिक यात्रा शुरू की है। बुधवार को पहले दिन यह बस करीब 12 किलोमीटर तक निरीक्षण मार्ग पर चली, जिसमें लगभग ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ। इसकी लागत 250 रुपए से भी कम बताई गई।

हालांकि प्रशासन ने जिस ट्रैवलर बस का उपयोग शुरू किया है, वह प्रतिदिन 4100 रुपए के किराए पर ली गई है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि सामूहिक यात्रा से ईंधन की बचत के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है।

रोज सुबह 6 बजे से शुरू हो रहा निरीक्षण

सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन लगातार फील्ड में सक्रिय है। करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए घाटों तक पहुंचने वाले एप्रोच रोड, पार्किंग व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर रोज समीक्षा की जा रही है।

अधिकारियों की टीम प्रतिदिन सुबह 6 बजे निरीक्षण के लिए निकल रही है। निरीक्षण के दौरान करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण भी किया जा रहा है। अधिकारी मौके पर ही निर्माण कार्यों, पहुंच मार्गों और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

“टीम भावना भी मजबूत होगी” : आशीष सिंह

संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने इस नई व्यवस्था को प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से पहुंचते थे, जिससे ईंधन और सरकारी संसाधनों का अनावश्यक उपयोग हो रहा था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय और टीम भावना भी मजबूत होगी।

ट्रैफिक दबाव भी होगा कम

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी वाहनों का काफिला निकलने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक ही बस में अधिकारियों के साथ जाने से सड़क पर वाहनों की संख्या कम होगी और जाम जैसी स्थिति में भी राहत मिलेगी। उन्होंने इस व्यवस्था को व्यावहारिक और अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि इससे प्रशासनिक कार्यों में समन्वय बढ़ेगा और खर्चों में भी कमी आएगी।

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