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रक्षाबंधन पर गणेश जी बने भाई, उज्जैन में देश-विदेश से भेजी गईं 100 से ज्यादा राखियां: मुंबई से आई सोने की गिन्नी वाली राखी बनी आकर्षण, पूजा कर विधिवत होगी अर्पित!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है, लेकिन मध्यप्रदेश के उज्जैन में इस त्योहार को एक अनोखी धार्मिक आस्था से जोड़ा गया है। यहां बहनें केवल अपने रक्त संबंधी भाइयों को ही नहीं, बल्कि भगवान गणेश को भी अपना भाई मानते हुए राखी भेजती हैं। उज्जैन के प्रसिद्ध “बड़े गणेश मंदिर” में भगवान गणेश को रक्षाबंधन पर हर साल देश-विदेश की बहनों द्वारा भेजी गई राखियां अर्पित की जाती हैं।
इस वर्ष भी यह परंपरा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। मंदिर से जुड़े ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास ने जानकारी दी कि भारत के विभिन्न शहरों से लेकर अमेरिका, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों से भी भगवान गणेश के लिए राखियां भेजी गई हैं। ये सभी राखियां सीधे पंडित व्यास के घर पहुंचाई गई हैं, जहां विधिवत पूजन के पश्चात भगवान को अर्पित किया जाएगा। हालांकि कुछ राखियां समय पर नहीं पहुंच सकीं, लेकिन जो राखियां प्राप्त हुई हैं, उन्हें खास साज-सज्जा के साथ पूजा स्थल पर रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि महाकाल मंदिर के समीप स्थित इस मंदिर में भगवान गणेश की 15 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा विराजमान है, जिसे श्रद्धालु “बड़े गणेश” के नाम से जानते हैं। यह प्रतिमा सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था का केंद्र है। भगवान शिव को पिता और पार्वती को माता मानने वाली महिलाएं गणेश जी को अपना भाई मानती हैं और उसी भावना के साथ रक्षाबंधन पर उन्हें राखी भेजती हैं।
इस बार मुंबई की राजकुमारी जैन द्वारा भेजी गई सोने की गिन्नी लगी राखी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसे हर साल की तरह इस बार भी गणेश जी को अर्पित किया जाएगा। भगवान गणेश के साथ-साथ उनकी दोनों पत्नियां—रिद्धि और सिद्धि को भी राखियां बांधी जाती हैं, ताकि समृद्धि और सुख-संवृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो।
राखियां इस साल बेंगलुरु, मुंबई, भोपाल, इंदौर और जयपुर जैसे शहरों से आई हैं। हालांकि, विदेश से भेजी गई कुछ राखियां डाक व्यवस्था के चलते देर से पहुंच रही हैं, लेकिन उन्हें भी पूजन के बाद भगवान को समर्पित किया जाएगा।
पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन सभी राखियों की विशेष पूजा की जाएगी। यह परंपरा वर्षों से चलती आ रही है और हर साल इस आयोजन में बहनों की श्रद्धा और जुड़ाव और गहरा होता जा रहा है।