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कालों के काल महाकाल के दरबार में सबसे पहले खेली गई होली: धुलेंडी के दिन महाकाल को अर्पित हुआ हर्बल गुलाल, भक्तों में उमड़ा उल्लास
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आज धुलेंडी के पावन अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और रंगों की अनूठी छटा बिखरी। ब्रह्ममुहूर्त में चार बजे भस्म आरती का शुभारंभ हुआ, जहां सबसे पहले बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया गया। जैसे ही गुलाल की पहली आहट भगवान की प्रतिमा पर पड़ी, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के उद्घोष से गूंज उठा।
इससे पहले गुरुवार को उज्जैन के पावन धरा पर स्थित महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को सबसे पहले होली महापर्व का भव्य आयोजन हुआ। संध्या आरती से पहले, नैवेद्य कक्ष में श्री चंद्रमौलेश्वर भगवान, कोटितीर्थ कुंड परिसर में स्थित श्री कोटेश्वर, श्री रामेश्वर, और सभा मंडप में विराजमान श्री वीरभद्र को गुलाल अर्पण किया गया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर को शकर की माला धारण करवाई गई और फिर हर्बल गुलाल से बाबा को रंगों की आभा में सराबोर किया गया। जैसे ही गुलाल भगवान के चरणों में चढ़ाया गया, पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
दरअसल, महाकालेश्वर केवल उज्जैन के ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के अधिपति हैं। वे काल के भी देवता हैं और इसलिए हर बड़े पर्व की शुरुआत सबसे पहले उनके आंगन से होती है. ऐसे में शाम को संध्या आरती के पश्चात ओंकारेश्वर मंदिर के बाहर पारंपरिक विधि-विधान से होलिका दहन किया गया। कंडों से बनी इस होलिका में श्रद्धालुओं ने आहुति दी और बुराई के अंत के प्रतीक रूप में बुराई को जलाकर सच्चाई की विजय का संदेश दिया। इस बार सुरक्षा कारणों से श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के आगे जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद भक्तों की श्रद्धा और उल्लास में कोई कमी नहीं आई। होलिका दहन के अवसर पर महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की असंख्य भीड़ उमड़ पड़ी।
बता दें, इस बार मंदिर में केवल एक किलो हर्बल गुलाल बाबा को अर्पित किया गया, जिससे मंदिर का वातावरण रंगों की दिव्य आभा से सराबोर हो गया। आरती के दौरान आईजी उमेश जोगा, कलेक्टर नीरज सिंह और प्रशासक प्रथम कौशिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भोपाल में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली, जब मुस्लिम भाईचारे ने हिंदू समाज के साथ मिलकर होलिका दहन किया। वहीं, बुरहानपुर में इस बार 3100 कंडों की भव्य होली जलाई गई, जो इस पवित्र पर्व की अनूठी भव्यता को दर्शाती है।
गौरतलब है की महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है—कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से आरती का समय ठंड के अनुसार तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुरूप। इस वर्ष 15 मार्च, यानी होली के दूसरे दिन से भगवान महाकाल की दिनचर्या में परिवर्तन होगा। इस दिन से ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत मानी जाती है, और बाबा को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। शरद पूर्णिमा तक यह परंपरा जारी रहेगी, और इस दौरान प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरतियों का समय भी बदला जाएगा।