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भावांतर योजना पर भरोसा नहीं, MSP पर खरीदी की मांग तेज़: उज्जैन से गूँजी किसान आंदोलन की हुंकार, भारतीय किसान संघ बोला- 2018 का जख्म अभी ताजा!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्यप्रदेश में किसानों ने सरकार को साफ संदेश दिया है कि यदि भावांतर योजना को निरस्त कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सुनिश्चित नहीं की गई, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन होगा। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने उज्जैन में मीडिया से बातचीत में यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होगी।
सोयाबीन किसान सबसे ज्यादा संकट में
कमल सिंह आंजना ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र है। लेकिन इस बार मौसम की मार और बाजार में दाम गिरने से किसान बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
सोमवार को भारतीय किसान संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई, जिसमें मालवा, मध्यभारत और महाकौशल प्रांतों के पदाधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भावांतर योजना में सोयाबीन खरीदी किसानों के हित में नहीं है।
MSP पर खरीदी की मांग
बैठक में यह मांग रखी गई कि राज्य सरकार केंद्र से आग्रह करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सोयाबीन खरीदी की प्रक्रिया जल्द शुरू करे। साथ ही किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया भी शीघ्र प्रारंभ की जाए।
“भावांतर पर भरोसा नहीं”
किसान संघ का कहना है कि प्रदेश के किसानों का भावांतर योजना पर अब भरोसा नहीं बचा है। कमल सिंह आंजना ने आरोप लगाया कि 2018 में घोषित भावांतर की राशि किसानों को अब तक पूरी तरह नहीं मिली। किसानों का मानना है कि भावांतर योजना केवल “छलावा” साबित हुई है।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
इस अहम बैठक में कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे। इनमें क्षेत्र संगठन मंत्री महेश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, महामंत्री चंद्रकांत गौर, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र पालीवाल, मालवा प्रांत संगठन मंत्री अतुल माहेश्वरी, प्रांत महामंत्री रमेश दांगी और प्रांत मंत्री भारत सिंह बैंस प्रमुख रूप से मौजूद थे।