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21 दिन बाद पहुंचा कनाडा में मारे गए छात्र गुरकीरत का पार्थिव शरीर: CM मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, सरकार ने उठाया 40-50 लाख का खर्च
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के युवा छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा को शुक्रवार को नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी जा रही है। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर शहर पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पार्श्वनाथ सिटी स्थित उनके निवास पर परिजन, रिश्तेदार, सिख समाज के लोग और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन बना हुआ था।
गुरकीरत की अंतिम यात्रा घर से शुरू हो चुकी है, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई चक्रतीर्थ श्मशान घाट पहुंचेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शव यात्रा देवास रोड, संजीवनी हॉस्पिटल चौराहा, फ्रीगंज के सुख सागर गुरुद्वारा साहिब, टावर चौक, चामुंडा माता मंदिर, आगर रोड, मंगलनाथ मार्ग और पीपलीनाका होते हुए निकाली जा रही है। रास्ते भर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।
इससे पहले, गुरुवार देर रात उनका पार्थिव शरीर अहमदाबाद से एम्बुलेंस के जरिए उज्जैन लाया गया था। गुरुवार शाम को शव कनाडा से अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा, जहां आवश्यक कस्टम और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। करीब 21 दिनों के लंबे इंतजार के बाद परिवार अपने बेटे का चेहरा आखिरी बार देख सका।
गौरतलब है कि 14 मार्च को कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन शहर में गुरकीरत सिंह के साथ एक दर्दनाक घटना हुई थी। वहां 10 से 12 युवकों ने पहले उनके साथ मारपीट की और फिर उन पर गाड़ी चढ़ा दी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे उज्जैन शहर को झकझोर कर रख दिया।
शव के उज्जैन पहुंचने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल भी गुरकीरत के निवास पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और सरकार इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के माध्यम से लगातार प्रयास किए गए, जिसके बाद गुरकीरत का पार्थिव शरीर स्वदेश लाया जा सका।
सांसद अनिल फिरोजिया ने भी इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि कनाडा के नियमों के चलते शव लाने में समय लगा और इसमें भारी खर्च आता है। उन्होंने बताया कि करीब 40 से 50 लाख रुपए तक का खर्च था, जिसे सरकार ने वहन किया, ताकि परिवार को किसी तरह की आर्थिक परेशानी न हो।
गुरकीरत की अंतिम यात्रा के दौरान पूरे शहर में शोक का माहौल है। हर कोई इस युवा छात्र को श्रद्धांजलि दे रहा है और परिवार के इस असहनीय दुख में सहभागी बन रहा है। यह घटना एक बार फिर विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।