- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा, कहा - “काम में रुकावट नहीं चलेगी”; अधिकारियों को 24×7 सक्रिय रहने के दिए निर्देश
- महाकाल मंदिर में अलसुबह गूंजी घंटियां, वीरभद्र के कान में स्वस्तिवाचन के बाद खुले पट; भस्म अर्पण के बाद शेषनाग रजत मुकुट में सजे बाबा
- शादी से मना करने पर घर में घुसा युवक, युवती पर किया हमला; 48 घंटे में गिरफ्तार
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
अनुशासनहीनता पर ‘जीरो टॉलरेंस’: उज्जैन में आरक्षक की गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर विभाग ने उठाया सख्त कदम, उज्जैन पुलिस विभाग ने किया सेवा से बर्खास्त!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
एक ओर जहां मध्यप्रदेश पुलिस अपने अनुशासन और सेवा के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी ओर उज्जैन में पदस्थ एक आरक्षक ने अपनी हरकत से पूरे महकमे की गरिमा को कलंकित कर दिया। यह मामला 7 दिसंबर 2023 की रात का है, जब आरक्षक राहुल होलकर (बैज नंबर 1120) ने अपने साथी आरक्षक शिवप्रताप राजावत के साथ बड़नगर बायपास स्थित “माली तड़का बियर बार” में घुसकर ऐसा कृत्य कर डाला, जिसने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया। दोनों सादी वर्दी में थे, लेकिन राहुल होलकर ने अपनी सरकारी सर्विस पिस्टल को खुलेआम टेबल पर रखकर शराब पीना शुरू कर दिया। आम नागरिकों के बीच सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले आरक्षक का यह रूप देखकर हर कोई हक्का-बक्का रह गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से राहुल को लाइन अटैच कर जांच के आदेश दिए गए थे।
करीब डेढ़ साल तक चली विभागीय जांच के बाद अब फैसला सामने आ गया है – गुरुवार को उज्जैन पुलिस विभाग ने आरक्षक राहुल होलकर को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभाग ने माना कि राहुल का यह आचरण अत्यंत अनुशासनहीन, असंवेदनशील और पुलिस सेवा की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है। एक सुरक्षा कर्मी द्वारा नशे की हालत में हथियार के साथ सार्वजनिक स्थान पर जाना, न केवल कानून के दायरे का उल्लंघन है, बल्कि आमजन की सुरक्षा पर भी सीधा खतरा पैदा करता है।
वहीं, इस मामले में शामिल दूसरे आरोपी आरक्षक शिवप्रताप राजावत को भी हल्की सजा दी गई है। पुलिस लाइन उज्जैन में तैनात शिवप्रताप की एक वेतन वृद्धि रोक दी गई है, जो विभागीय दायित्वों के प्रति उसकी लापरवाही और अनुशासनहीनता का दंड है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि अब पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है।