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अष्टमी पर देवी काे शराब का ही भोग, कलेक्टर बोले- परंपरा में बदलाव नहीं
उज्जैन | शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर नगर पूजा में गुदरी चौराहा के पास स्थित प्राचीन चौबीस खंभा देवी काे शराब का ही भोग लगेगा। कलेक्टर संकेत भोंडवे ने कहा पूजा परंपरा में कोई बदलाव नहीं होगा। 28 सितंबर को 40 मंदिरों में होने वाली नगर पूजा के लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। परंपरा अनुसार कलेक्टर खुद शराब की धार चढ़ाकर नगर पूजा का शुभारंभ करेंगे। विद्वानों में नगर पूजा में देवी को शराब की जगह मिठाई का भोग लगाने को लेकर हाल ही में लंबी बहस हो चुकी है। पिछले दिनों शांति समिति की बैठक में महंत डॉ. रामेश्वरदास महाराज ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि देवी को शराब की जगह मिठाई का भोग लगना चाहिए। इसी बैठक में मौजूद कई विद्वानों ने परंपरा से कोई छेड़छाड़ नहीं किए जाने की प्रशासन को चेतावनी दी थी। उज्जयिनी विद्वत परिषद के डॉ. मोहन गुप्त व सदस्यों ने भी देवी मंदिरों में शराब चढ़ाने का विरोध किया था। वहीं पंचांगकर्ता एवं ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास सहित कई विद्वानों का कहना है देवी काे शराब चढ़ाने की परंपरा तामसिक पूजा का हिस्सा है। यह परंपरा राजाओं के समय से है। इसलिए आज तक प्रशासन भी शासकीय तौर पर नगर पूजा की परंपरा का निर्वहन करता आया है। नगर पूजा की तैयारियों में जुटे तहसीलदार सुदीप मीणा ने कहा जो सालों से परंपरा चली आ रही है, उसी रूप में नगर पूजा होगी। अष्टमी की सुबह चौबीस खंभा देवी मंदिर से पूजा आरंभ होकर दिनभर 40 मंदिरों में पूजा कर रात में अंकपात के पास हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर समाप्त की जाएगी।
शराब की धार टपकाते चलेंगे, खर्च अधिकारी-कर्मचारी जुटाएंगे
नगर पूजा में होने वाला खर्च शासन से तो नाममात्र ही मिलता है। परंपरा को जिंदा रखने के लिए इसमें खर्च होने वाली हजारों रुपए की राशि आज भी तहसील कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी आपस में चंदा कर जुटाते हैं। पूजन से लेकर भोग तक कई प्रकार की सामग्री इसमें लगेगी। नगर पूजा में ढोल व लाल ध्वज के साथ आगे एक व्यक्ति मिट्टी की हांडी में भरी शराब की धार टपकाते हुए पैदल चलेगा। मार्ग में माता व भैरव मंदिरों में कई जगह शराब चढ़ाई जाएगी। शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में दोपहर ठीक 12 बजे सरकारी पूजा होगी।