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आखिरकार जीता प्यार:झाबुआ की युवती बनारस पहुंचकर मां बनी, 9 साल बाद पुलिस ने पति को रेप के आरोप में पकड़कर जेल भेजा
उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में पिछले दिनों ऐसा वाकया हुआ, जिसमें झाबुआ जिले की भामरीबाई (परिवर्तित नाम) का प्यार अपने से 10-12 साल बड़े रिश्तेदारी में एक विवाहित पुरूष दिवाने (परिवर्तित नाम) से हो गया। भामरी नाबालिग थी, उसका प्रेम परवान चड़ा और गांव छोड़कर भाग गए। माता-पिता ने थाने में रिपोर्ट लिखाई, पुलिस ने अपनी सर्च जारी रखी और लगभग 9 साल बाद बनारस में दोनों का होने का पता चला। जिसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर भामरीबाई को माता-पिता के सुपूर्द किया और पति को जेल भेज दिया। भामरीबाई के परिवार द्वारा दिवाने के खिलाफ यौन शोषण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन भामरीबाई ने भी परिवारजनों के साथ जाने से इनकार कर दिया और पुलिस द्वारा वन स्टॉप सेंटर झाबुआ भेजा गया। वहां से छह माह पूर्व उसे उसके बालक चन्दन (परिवर्तित नाम) के साथ सेवाधाम भेजा गया। 9 साल पहले दोनों ने भगवान को साक्षी मानकर विवाह कर लिया था और अब दोनों के एक 8 साल का एक बच्चा है।
प्यार झुकता नहीं
सेवाधाम आने के बाद भामरीबाई गुमसुम, चुपचाप रहने लगी, उसे अपने पति की याद आ रही थी। भामरीबाई के परिवार वाले सेवाधाम में उससे मिलने आए, उसे कई प्रलोभन दिए, दूसरी शादी का प्रस्ताव दिया, बच्चे को छोड़ने का प्रस्ताव रखा, पुलिस ने भी भामरीबाई के बयान लिए लेकिन भामरीबाई किसी भी रूप में विचलित नहीं हुई। वह किसी भी शर्त पर अपने माता-पिता और परिवार के साथ जाने को तैयार नहीं थी। माता-पिता के दबाव में भामरीबाई ने अपने परिवार के साथ जाने का निर्णय लिया, जब तक पति जेल से छूट नहीं जाता। माता-पिता के शपथ पत्र के अनुसार पति के आने के बाद उसके जिम्मे सौंप देंगे और मारपीट या दूसरी शादी नही करेंगे, लेकिन भामरीबाई का विश्वास जीत गया और जिस दिन माता-पिता और परिवार के साथ पुलिस न्यायालय अपर जिला दण्डाधिकारी झाबुआ के आदेश से सेवाधाम लेने पहुंचे, उसी दिन भामरीबाई को मालूम पड़ा कि उसके पति की रिहाई हो गई, तो उसने अपने माता-पिता के साथ जाने से मना कर दिया और अंततः न्यायालय अपर जिला दण्डाधिकारी झाबुआ के पुनः आदेश से ही उसके पति को सौंपा गया।
इस प्रेम कहानी में दोनों का एक-दूसरे के प्रति स्नेह, प्रेम, सपर्पण, आस्था और विश्वास छिपा हुआ था, जिसकी जीत हुई।
भामरीबाई सेवाधाम में जब तक रही बुजूर्गों, बच्चों की सेवा की
भामरीबाई जब तक सेवाधाम में रही अपने पति की माला जपती रही, सरल, सादी और कुछ पढ़ी-लिखी अब नाबालिग से बालिग हो चुकी है। वह लगभग 25 साल की हो गई और अपने माता-पिता के कई प्रलोभनों को छोड़कर उसने अपने पति को अपनाया और पुनः घर बसाने के सपने देखती हुई सेवाधाम से विदा हुई। इस दौरान सेवाधाम में जब तक रही बुजूर्गों, बच्चों की सेवा करती रही।