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उज्जैन में होने जा रहा है ऐसा विराट सम्मेलन, जो पहले कभी नहीं हुआ…
उज्जैन. श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैनी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का विराट गुरुकुल सम्मेलन होगा। देश में गुरुकुल परंपरा बढ़ाने के उद्देश्य से संभवत: यह पहला ऐसा सम्मेलन है, जिसमें भारत सहित विभिन्न देशों के गुरुकुल संचालक सहित करीब ५ हजार विद्वान व शिक्षाविदों को आमंत्रित किया गया है।
विराट गुरुकुल सम्मेलन
भारतीय शिक्षण मंडल गुरुकुल प्रकल्प, संस्कृति विभाग व महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान की ओर से २८ अप्रैल विराट गुरुकुल सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। चिंतामण स्थित महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान में ३० अप्रैल तक चलने वाले दिन दिवसीय सम्मेलन में भारत के अलावा नेपाल, तिब्बत, भूटान, श्रीलंका व इंडोनेशिया में संचालित गुरुकुल के संचालक, व्यवस्थापक, सौ विश्वविद्यालय के कुलपति आदि को आमंत्रित किया गया है। भारतीय शिक्षण मंडल अखिल भारतीय संयुक्त महामंत्री अरुणा सारस्वत ने बताया, सम्मेलन में गुरुकुल परंपरा को बढ़ाने के उद्देश्य से मंथन-चिंतन होगा।
भागवत करेंगे शुभारंभ
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के शामिल होने की संभावना है। उनके अलावा उद्घाटन सत्र में सत्यमित्रानंदगिरि महाराज, गुरु शरणानंद महाराज, स्वामी राजकुमारदास, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को आमंत्रित किया गया है। समापन में संघ के सरकार्यवाह, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ व शिवराजसिंह चौहान को आमंत्रित किया है।
१५०० रूम की व्यवस्था में जुटा प्रशासन
विराट सम्मेलन में करीब ५ हजार विद्वजनों को आमंत्रित किया गया है। उनके ठहरने के लिए शहर में लगभग १५०० रूम्स-हॉल की आवश्यकता का आकलन है। सूत्रों के अनुसार व्यवस्था के लिए प्रशासनिक अधिकारी अभी से तैयारी में जुट गए हैं।
शिक्षा की दिशा के लिए गुरुकुल जरूरी
आयोजन को लेकर मंडल की संयुक्त महामंत्री सारस्वत ने बताया, गुरुकुल परंपरा भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था है। मंडल से करीब १२०० गुरुकुल जुड़े हैं। गुरुकुल को लेकर मंडल दस वर्ष से कार्य कर रहा है। वर्तमान में शिक्षा की जो स्थति है उसकी दशा सुधारने और दिशा तय करने के लिए गुरुकुल पंरपरा की ओर लौटना आवश्यक है। सारस्वत के अनुसार गुरुकुल शब्द से अभी बटुकों की शिक्षा की कल्पना ही आती है जबकि एक विद्यार्थी पर करीब ४ लाख रुपए खर्च होते हैं जो सामाजिक भागीदारी से संभव हो पाता है। १२ वर्ष बाद विद्यार्थी गुरुकुल से निकलता है तो वह इतना सक्षम हो चुका होता है कि उसे किसी डिग्री या आजीविका चलाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता। १० वर्ष में गुरुकुलों के जो परिणाम देखने को मिले हैं, उनसे यही लगता है कि यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो गुरुकुल परंपरा को बढ़ाना होगा। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर विराट गुरुकुल सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। उज्जैन श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली व गुरुकुल परंपरा का प्रसिद्ध स्थान रहा है, इसीलिए यह सम्मेलन यहां किया जा रहा है।