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ऑक्सीजन के अभाव में 2 मौतें हो गई शासकीय माधवनगर हॉस्पिटल में ?
तरल ऑक्सीजन एवं सिलेंडर के ठेको को लेकर चल रहा दो अधिकारियों के बीच विवाद
उज्जैन।सोमवार को शा.माधवनगर के आर्थो वार्ड में दो मरीजों की मौत हुई। इन मौतों को कोरोना संदिग्ध मानते हुए बताया गया कि ये अन्य गंभीर बिमारी/कार्डियक अटेक के कारण हुई। यदि प्रशासन निष्पक्षता से जांच करवाए और स्टॉफ सहित समीप के पलंगों पर उपचार करवा रहे मरीजों के बयान करवाए तो साफ हो जाएगा कि दोनों की मृत्यु ऑक्सीजन की कमी से हुई। ऐसा ऑक्सीजन पाइप लाइन में कथित खराबी एवं कम क्षमता से ऑक्सीजन के प्रवाह के कारण होना बताया जा रहा है। हालांकि स्टॉफ ने इस मामले में चुप्पी साध ली है।
सूत्रों का दावा है कि बात अस्पताल से बाहर तब निकली जब एक से अधिक मरीजों ने अपने परिजनों को मोबाइल फोन पर हालचाल बताते हुए किस्सा सुनाया। उनका कहना था कि ऑक्सीजन की कमी से दो मरीजों को बैचेनी हुई। स्टॉफ कुछ समझता, तब तक दोनों के प्राण निकल चुके थे। बाद में उन्हें ंआयसीयू में ले जाया गया, जबकि आईसीयू फुल बताया जा रहा था। वहां पर उपचार दिया गया और बाद में कहा गया कि दोनों चल बसे। मरीजों के अनुसार उन्हें बहुत डर लग रहा हैं।
यह है स्टॉफ के बीच से उठ रही बातें
इधर स्टॉफ के मन को टटोला गया तो आरोपों की बोछार हो गई। आरोप लगाए गए कि सिविल सर्जन और सीएमएचओ ने इस हॉस्पिटल के इंतजामों के प्रति आंखे मूंद ली गई है। तरल ऑक्सीजन टैंक और ऑक्सीजन के सिलेण्डर के ठेके गत वर्ष आपसी खींचतान के कारण दो अधिकारियों ने अलग-अलग कर दिए थे। जब मरीज कम हुए तो तरल ऑक्सीजन का सिस्टम बंद कर दिया गया, जबकि उससे हाई फ्लो ऑक्सीजन मरीज को मिल जाती है।
सिलेण्डर खत्म होने का और डिलेव्हरी समय पर नहीं होने का रोना रहता है। जब ऑक्सीजन की सेंट्रल लाइन नई डली,तब भी उसमें तकनीकी खराबी थी। इसी खराबी के कारण मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाई। गत वर्ष भी ऐसा ही हादसा हुआ था। उस समय लाइट जाने का दोष बताया गया। अब बताया जा रहा है कि गंभीर बीमारी से मौत हुई। आरोप लगाया गया कि अब तरल ऑक्सीजन टेंक चालू कर दिया गया है,तब भी सिलेण्डर की उपलब्धता को लेकर माथाफोड़ी होती रहती है।
इनका कहना है
इस संबंध में चर्चा करने पर सीएमएचओ डॉ.महावीर खंडेलवाल ने बताया कि उन्हें ऐसी जानकारी संज्ञान में लाई गई है। वे पूछताछ कर रहे हैं। आवश्यक हुआ तो जांच बैठाएंगे।