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खूब बिकी चायना डोर
उज्जैन: मकर संक्रांति पर छतों पर दिनभर काटा है का शोर गूंजा। अलसुबह से ही बच्चे छतों पर पहुंचे। सर्द हवाओं के बीच महिलाओं एवं बड़ों ने भी बच्चों का साथ दिया। सुबह से छतों पर पतंगबाजी का दौर शुरू हुआ जो देरशाम तक चला। मकर संक्रांति पर वीकेंड होने से लोगों का उत्साह दोगुना हो गया। छतों पर ही लोगों ने तिल-गुड़ व अन्य व्यंजनों का लुत्फ उठाया। डीजे पर बजते फिल्मी गीतों पर युवा थिरकते रहे। इधर शिप्रा में स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। उन्होंने शिप्रा में स्नान कर सूर्य को अघ्र्य दिया और सुख-समृद्धि की कामना की। इसके अलावा मंदिरों में भी भीड़ रही।
खूब बिकी चायना डोर
इधर जिला प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद शहर में मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर तोपखाना और शहीद पार्क पर खूब चायना डोर बिकी। प्रशासन की नाक के नीचे चायनीज मांझा बिकता रहा लेकिन उन्होंने कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा। दुकानों पर पहुंचे लोगों ने भी चायना डोर की ही मांग की। इधर मकर संक्रांति पर भी लोगों ने जमकर चायना डोर का इस्तेमाल किया। इससे पंछी तो घायल हुए ही लोग भी परेशान होते रहे। विभिन्न चौराहों पर निकलने वाले लोग डोर गले और गाडिय़ों में फंसने से परेशान होते रहे।
मंदिर जा रहे वृद्ध का गला कटा
प्रशासन की लापरवाही के चलते शनिवार को एक वृद्ध घर से भगवान के मंदिर जा रहे वृद्ध का गला शनिवार को चायना मांझे में उलझकर कट गया। इससे गले पर गहरा घाव हो गया और लगातार खून बहने लगा। ताबड़तोड़ उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां ७० टांके लगाए गए। अभी वे बोल नहीं पा रहे हैं। साईंधाम कॉलोनी निवासी दयाशंकर शर्मा (६८) शनिवार दोपहर दर्शन करने के लिए एक्टिवा से बड़ा गोपाल मंदिर जा रहे थे। जैसे ही वे हरिफाटक ब्रिज पर पहुंचे तो चायना मांझा उनके गले में उलझ गया। वे कुछ समझ पाते इससे पहले ही डोर से उनके गले में गहरा घाव हो चुका था। वे सड़क पर ही गिर गए। वहां से गुजर रहे राहगीरों ने किसी तरह उनके पुत्र को फोन पर सूचना दी। इसके बाद पुलिस की मदद से जिला अस्पताल लाया गया।
हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
संक्रांति पर्व पर भगवान महाकालेश्वर के दर्शनों के लिए सुबह से रात तक श्रद्धालु पहुंचते रहे। दिनभर में करीब ३० हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने गर्भगृह में प्रवेश बंद रखा। श्रद्धालुओं ने बैरिकेड्स से ही दर्शन किए। १५०० रुपए की रसीद करवाकर लोगों ने गर्भगृह में जाकर जल चढ़ाया। इससे पूर्व भस्मारती में बाबा को तिल से स्नान करवाया गया। इसके बाद बाबा को अन्नकूट लगाया गया।