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चिटफंड धोखाधड़ी : 6 जिलों में 48 शिकायतें, अकेले उज्जैन में ही 10
उज्जैन | प्रदेश में फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ शासन सख्त कार्रवाई करने के मूड में हैं। इसके लिए दो दिन पहले भोपाल में विभिन्न विभागों आला अफसरों की राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में रणनीति तय हुई। बैठक में जानकारी दी गई कि मई-2017 के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को प्रदेश में फर्जी चिटफंड कंपनियों की 48 शिकायतें मिली हैं। इनमें सर्वाधिक शिकायतें उज्जैन, इंदौर, सीहोर, रतलाम, रायसेन और ग्वालियर जिले से प्राप्त होना बताई गई।
अपर मुख्य सचिव वित्त एपी श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली इस बैठक में ऐसे प्रकरणों पर चिंता व्यक्त करते हुए उक्त जिला कलेक्टरों को इन फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए है। यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी जिला कलेक्टर व केन्द्र और राज्य सरकार के विभाग समन्वय के साथ इन कंपनियों के खिलाफ प्रभावी व कड़ी कार्रवाई करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह के.के. सिंह भी मौजूद थे। उज्जैन में फर्जी चिटफंड कंपनियों के सर्वाधिक मामले कोतवाली, माधवनगर और नीलगंगा पुलिस थाने में दर्ज हैं। इनकी जांच के लिए कोतवाली थाने को नोडल बनाया गया है। पुलिस अफसरों की मानें तो फर्जी चिटफंड कंपनियों के 10 से अधिक प्रकरण दर्ज हुए थे। इनकी पड़ताल में पता चला है कि शहर सहित आसपास के 400 से अधिक लोगों से इन कपंनियों ने 50 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की है। एक मामले में ऐसी एक कंपनी के सीईओ को पुलिस पकड़ कर भी लाई थी। जांच में पुलिस को इन कंपनियों के तार दिल्ली, देवास, बांसवाड़ा, बिहार से जुड़े होने की जानकारी भी हाथ लगी हैं।
चिटफंड से जुड़े मामलों की जांच करने वाले एसआई अनिल शुक्ला के अनुसार शहर में ताजा मामला मई 17 में माधवनगर पुलिस मंगरोला निवासी हेमंत प्रजापत की रिपोर्ट पर दर्ज किया था। यह कंपनी 90 से अधिक लोगों से 3 करोड़ 21 लाख 11 हजार की धोखाधड़ी कर भागी है। फ्रीगंज क्षेत्र में कंपनी का ऑफिस था। इसके 7 लोगों के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया जाकर जांच जारी है। कलेक्टर संकेत भोंडवे ने कहा शासन के निर्देशानुसार फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। बैठक में लिए निर्णय का पत्र आना अभी बाकी है।
दोगुना रुपए करने का देते हैं लालच
ये चिटफंड कंपनियां कहीं भी किराए के भवन में ऑफिस खोलकर लोगों को उनका पैसा एक निर्धारित अवधि में दो गुना करने का लालच देती है। ऐसे में इनके झांसे में ज्यादातर ग्रामीण, गरीब व कम पढ़े-लिखे लोग आ जाते हैं, जो लोग इनमें रुपए जमा करवा देते हैं उनसे कहा जाता है कि वे अपने परिचितों से भी रुपया इनवेस्ट करवाएं। इस तरह जब कंपनी के पास अच्छा खासा पैसा जमा हो जाता है तो ये रातोरात गायब हो जाती है। बाद में लोगों को पता चलता है कि वे धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उनके पास पुलिस के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होता।