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चुनाव -वाह क्या घोषणा पत्र हैं
प्रदेश विधान सभा चुनाव में पार्टियों के एक से बढ़कर एक लच्छेदार घोषणा पत्र हैं। एक घोषणापत्र में हर वर्ष 10 लाख लोगों को रोजगार का की ‘दृष्टि’ है। आईये जरा माथापच्ची करें और 10 लाख के गणित को समझें! एक वर्ष में 10 लाख का मतलब है हर माह 83333 रोजगार! इसमें 30 का भाग दीजिये -प्रतिदिन 2778 रोजगार! इसमें 24 का भाग दीजिये -प्रति घंटा 116 रोजगार! अर्थात यदि यह घोषणा पूरी हुई तो हर एक मिनट में 2 लोगों को रोजगार मिलेगा। लोकसभा चुनाव में हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार का वादा था। जिसका प्रतिदिन 54800 प्रति घंटा 2280 और प्रति मिनट 38 बनता है! अर्थात जितनी देर में आपने इस टिप्पणी को पढ़ते उतनी देर में 38 लोगों को रोजगार मिलना था। पर हुआ वही, जो होता आया है! और जो होता रहेगा!!
आईये, अब दूसरा घोषणा पत्र! प्रति परिवार एक बेरोजगार को 10000 रुपए मासिक भत्ता देने का ‘वचन’ है। एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक इस समय प्रदेश में लगभग 24 लाख बेरोजगार हैं।
24 लाख में 10000 का गुणा करने में मेरे केलकुलेटर ने हाथ खड़े कर दिए! बाद में गुणा किया तो उत्तर मिला- 2400 करोड़! यानी यदि वह पार्टी सत्ता में आई तो वह बेरोजगारों को 2400 करोड़ मासिक भत्ता देगी! और वाकई यदि ऐसा हुआ तो लोग अपना वर्तमान रोजगार छोडकर बेरोजगार होना अधिक पसंद करेंगे। जब बैठे -ठाले मोतीचूर का लड्डू मुंह में आ जाएं तो आदमी हाथ पांव क्यों हिलाए! दोनों घोषणाएं विरोधाभासी हैं।
यदि हर वर्ष 10 लाख लोगों को वाकई! रोजगार मिला तो तीन साल बाद प्रदेश में बेरोजगार चिराग लेकर ढंूढऩे पर नही मिलेंगे! और वाकई यदि 10000 प्रति माह बेरोजगारी भत्ता मिला तो भत्ते के लालच में एक वर्ष में ही प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या 24 लाख से बढ़कर 48 लाख हो जाएगी! और हो भी क्यों न! ये आराम का मामला है!