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नेपाल के आरोपियों को पकड़ने के लिए लेंगे इंटरपोल की मदद
उज्जैन | सांई विहार कॉलोनी निवासी कारोबारी पावेशसिंह सेंगर का नेपाल में अपहरण करने वाले आरोपियों को पकड़ने के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी। इसके लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाकर नेपाल पुलिस की मदद ली जाएगी। फिलहाल अपहरणकांड में नेपाल के चार लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच के बाद संख्या बढ़ सकती है। कोलकाता से गिरफ्तार किए मुख्य साजिशकर्ता सुरजीत मंडल ने शुक्रवार को जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई थी, जिसे कारोबारी की आपत्ति के बाद खारिज कर दिया गया।
पूरे घटनाक्रम का 15 िसतंबर को खुलासा होने के बाद कारोबारी पावेश खुद सामने आ गए। अब तक उन्होंने मामले को छुपाए रखा था। इधर, पुिलस का कहना है सुरजीत ने पूछताछ में हेमराज केसी, विष्णु अधिकारी, मनोज, दीपक के नाम कबूले थे। ये सभी नेपाल के हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए इंटरपोल की मदद लेंगे। नेपाल से आरोपियों को पकड़ना आसान नहीं है, इसलिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया जाएगा, ताकि नेपाल पुलिस की मदद मिले। टीअाई संजय वर्मा ने बताया एक आरोपी पकड़ाया है, जो जेल में है।
रोज पीटते, खाना तक नहीं देते थे
मैं कई साल कारोबार के चलते मुंबई में रहा। वहीं पर कोलकाता के सुरजीत से पहचान हुई। उसी ने कारोबार के सिलसिले में 23 तारीख को प्लेन का टिकट भेज नेपाल बुलवाया। मैं मुंबई और फिर काठमांडू (नेपाल) पहुंचा। 24 अगस्त को एयरपोर्ट पर उतरते ही सुरजीत व एक-दो अन्य लोग लेने आए। मुझे कार से गलियों में घुमाते हुए ले जाने लगे। कहा- होटल बाद में चलेंगे। पहले सरप्राइज पार्टी है। फिर एक मकान में ले गए, जहां कुछ लोग पहले से थे। वहां पहुंचते ही मुझे पीटना शुरू कर दिया। मैंने कारण पूछा तो बोले- तेरा अपहरण किया है। एक करोड़ रुपए चािहए। मैं घबरा गया। बोला- इतना पैसा कहां से लाऊंगा। वे बोले मुंबई का फ्लैट बेच दे। मैंने कहा- वो मेरा फ्लैट नहीं था। किराए का था। मेरा घर तो उज्जैन में है। वहीं मेरा परिवार रहता है। फिर उन्होंने मेरे मोबाइल से प|ी को वीडियो कॉल किया, तब उन्हें यकीन हुआ और एक करोड़ से 20 लाख पर आकर रुके।
हवाला कारोबारी के अकाउंट में डलवाए रुपए
उन लोगों ने मेरी प|ी को किसी अब्बास नाम के हवाला कारोबारी का अकाउंट नंबर दिया। उसी में रुपए डालना थे। इस बीच रोज पीटते रहे। मैं चीखता तो मुंह में कपड़ा ठूंस देते। प|ी ने 6.50 लाख रुपए अकाउंट में भेज दिए तब 28 तारीख को मुझे एयरपोर्ट छोड़ा इस पर एसटीडी से भाई संतोष को फोन कर टिकट करवाया। फिर अगली फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा तो परिवार के लोग नागझिरी पुलिस को लेकर एयरपोर्ट आ चुके थे। उज्जैन आने के बाद भी 3-4 दिन तक डरता रहा। प|ी ने मुझे छुड़वाने के लिए घर व कार तक बेचने की तैयारी कर ली थी। फिर बहनोई गयाप्रसाद भिंड व भाई संतोष ने एक-एक लाख की मदद की। बाकी रुपए रिश्तेदारों से उधार िलए।
-जैसा अपहर्ताओं से छूटकर आए पावेश ने बताया