- आज 12-12 घंटे का दिन-रात: उज्जैन की जीवाजी वेधशाला में वसंत संपात देखने पहुंचे छात्र-खगोलप्रेमी, आज से दिन होंगे लंबे
- 30 रोजों के बाद मनाई गई ईद: इंदिरा नगर ईदगाह में बड़ी संख्या में पहुंचे लोग, नमाज के बाद गले मिलकर बांटी खुशियां; पुलिस ने बढ़ाई सतर्कता
- शेषनाग मुकुट और मुण्ड माला से सजे बाबा महाकाल: तड़के भस्म आरती में भक्त हुए भाव-विभोर, ‘जय श्री महाकाल’ से गूंजा परिसर!
- उज्जैन में ‘नैवेद्य लोक’ बना नया फूड हब: CM ने किया था उद्घाटन, शाम 5 से रात 10 बजे तक लगेंगे फूड स्टॉल्स
- उज्जैन में चेटीचंड पर भव्य शोभायात्रा: CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी, झूलेलाल के जयकारे गूंजे
प्रदेश की पहली नगर निगम जो चलाएगी गोशाला, शहर से पकड़े मवेशी रखेंगे
उज्जैन :- नगर निगम प्रदेश की पहली ऐसी निगम होगी जिसकी अपनी गोशाला होगी। गोशाला बनाने के लिए मंगरोला हल्के में र|ाखेड़ी की 11 एकड़ जमीन कलेक्टर ने निगम को आवंटित कर दी है। यहां निगम अपनी गोशाला बनाएगा। जहां शहर के पकड़े गए मवेशी रखे जाएंगे। गोशाला का संचालन करने के लिए निगम गोसेवा आयोग और अन्य गोसेवा संगठनों की मदद भी ले सकता है।
निगम के पास शहर से पकड़े गए मवेशियों को रखने के लिए उर्दूपुरा में एक मात्र खिड़क (कांजी हाउस) है। यहां अधिकतम 150 मवेशियों को रखने की व्यवस्था है। इसलिए निगम ज्यादा संख्या में मवेशी पकड़े जाने पर उन्हें अन्य शहरों की गोशालाओं में भेजता है। निगम द्वारा लाए गए मवेशी रखने से कई गोशालाएं इंकार कर चुकी हैं। मवेशियों को रखने के लिए गोशाला नहीं होने से निगम परिषद ने स्वयं की गोशाला बनाने का निर्णय लिया था। इसी कड़ी में महापौर मीना जोनवाल और आयुक्त आशीषसिंह ने जमीन देखी थी। निगम ने गोशाला के लिए जमीन आवंटन के लिए कलेक्टर संकेत भोंडवे को प्रस्ताव भी दिया था। कलेक्टर ने सोमवार को र|ाखेड़ी की 11 एकड़ जमीन निगम को आवंटित कर दी है। संभवत: प्रदेश में नगर निगम द्वारा संचालित यह पहली गोशाला होगी।
शेड और फेंसिंग कर मवेशी रखेंगे
गोशाला की योजना लागू होने के पहले निगम यहां शेड और फेंसिंग कर मवेशी रखने की व्यवस्था करेगा। मवेशियों की देख-भाल और सुरक्षा के इंतजाम भी करेंगे। निगम ने 17 लाख रु. का टेंडर निकाला था। जमीन आवंटित हो जाने से इस राशि से गोशाला का प्राथमिक काम शुरू हो जाएगा। निगम आदर्श गोशाला बनाने के लिए कंसल्टेंट से निर्माण की योजना बनवाएगा। गोशाला कार्यालय, दूध आदि विक्रय काउंटर, मवेशी रखने के शेड, गोबर और गोमूत्र एकत्र करने के स्थान, उनसे खाद और कीटनाशक बनाने के प्लांट आदि व्यवस्थाएं की जाएंगी।
दूध, खाद और कीटनाशक से कमाई
गोशाला संचालन के लिए निगम गोसेवा आयोग की मदद ले सकता है। इसके अलावा गो संरक्षण और संवर्धन के लिए काम कर रहे स्वयं सेवी संगठनों के साथ मिल कर भी योजना बनाई जा सकती है। गोशाला में दूध के अलावा गोबर से बनने वाली जैविक खाद और गोमूत्र से बनने वाले कीटनाशक की बिक्री भी आय का साधन हो सकती है। इससे गोशाला संचालन में निगम को आर्थिक मदद मिलेगी।
आदर्श गोशाला बनाएंगे
गोशाला की जमीन के लिए प्रय| किए, आखिरकार सफलता मिल गई। अब गोशाला का निर्माण करेंगे। इसे आदर्श गोशाला के रूप में स्थापित करेंगे। शहर के गोवंश को सुरक्षित रखने के लिए स्थान मिल गया है। मीना जोनवाल, महापौर