- 40° के पार तापमान, फिर भी नहीं थमी आस्था: महाकाल में रोज 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु; पहली बार महाकाल लोक में शुरू हुआ फोगिंग सिस्टम
- उज्जैन की 5 माह की बच्ची SMA-1 से जूझ रही: 15 करोड़ के इंजेक्शन के लिए जंग, सोनू सूद ने बढ़ाया हाथ; भोपाल एम्स में चल रहा इलाज
- 15 साल पहले खत्म हो चुकी थी लीज; हाईकोर्ट से स्टे हटते ही UDA का एक्शन, बेगमबाग में 5 मकान तोड़े; अब तक 30 से ज्यादा निर्माण हटाए जा चुके
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: स्वस्ति वाचन के बाद खुले पट, पंचामृत अभिषेक के बाद पुष्पों से दिव्य श्रृंगार
- सप्तसागर विकास को गति देने के निर्देश: निगम आयुक्त ने चार प्रमुख जलाशयों का किया निरीक्षण, गहरीकरण-सौंदर्यीकरण पर जोर
बदली महाकाल की दिनचर्या : महाकाल के शीश अविरल जलधारा
उज्जैन | ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से राजाधिराज महाकाल की दिनचर्या बदल गई है। मंदिर की परंपरा अनुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से तेज गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए उनके शीश गलंतिका बांधने की शुरुआत हुई। 11 मिट्टी के कलश से भगवान पर अविरल जलधारा प्रवाहित की जाएगी।
पं. महेश पुजारी ने बताया धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान शंकर ने विषपान किया था। गर्मी में विष की ऊष्णता और भी बढ़ जाती है, इसलिए इस मौसम में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए 11 मिट्टी के कलश की गलंतिका बांधी जाती है। इसके द्वारा भगवान के शीश पर सुबह 6 से शाम को 4 बजे तक जलधारा प्रवाहित की जाती रहेगी।
दो ज्येष्ठ, इसलिए तीन माह बंधेगी गलंतिका
पुजारी प्रदीप गुरु ने बताया महाकाल में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ण पूर्णिमा तक दो माह गलंतिका बांधने की परंपरा है, लेकिन वर्षों बाद इस बार ज्येष्ठ अधिकमास के रूप में आ रहा है, इसलिए इस बार तीन माह गलंतिका बांधी जाएगी। 1 अप्रैल से शुरु हुआ गलंतिका बांधने का सिलसिला 28 जून तक चलेगा।