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सिंहस्थ की परिकल्पना तीन वर्षों में साकार
उज्जैन:सिंहस्थ 2016 में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक हरिगिरी महाराज ने नीलगंगा तालाब की दयनीय स्थिति को देखा तो उनका मन व्यथित हो उठा। उन्होंने तो यहां डेरा डालने अथवा अखाड़ों की पेशवाई निकालने से भी मना कर दिया लेकिन मंत्रियों व प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध के बाद उन्होंने तालाब को पौराणिक गौरव प्रदान करने की परिकल्पना की और तीन वर्षों बाद वह साकार भी हो गई। लगातार प्रयासों व गहरीकरण के बाद नीलगंगा सरोवर में गंगा का निर्मल पानी चारों ओर नजर आ रहा है।नीलगंगा सरोवर किनारे जूना अखाड़े का तीन मंजिला भवन बनाया है। इसकी खासियत यह है कि इसे शिवलिंग का आकार दिया गया है जिसमें 56 कमरे हैं। पास में 182 फीट ऊंचा स्तंभ भी है। इसका लोकार्पण गंगा दशहरे के पर बधवार को अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज की उपस्थिति में होगा।
स्कंद पुराण में आता है उल्लेख
नीलगंगा सरोवर का पौराणिक महत्व है जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में आता है। ब्रह्मजी के कहने पर स्वयं गंगाजी महाकाल वन में प्रकट हुईं। यहां भगवान महाकाल की दृष्टि पडऩे से गंगाजी का नीला स्वरूप पुन: मूल स्वरूप में परिवर्तित हुआ। पुरातन काल में नीलगंगा सरोवर का पानी शिप्रा में प्रवाहमान होता था। इसी सरोवर के किनारे जूना अखाड़ा का पड़ाव स्थल भी था। सिंहस्थ महापर्व के दौरान सभी अखाड़ों के श्रीमहंत इसी स्थान पर डेरा डालते और पेशवाई के रूप में मेला क्षेत्र में पहुंचते थे।
13 अखाड़ों ने किया था स्नान
सिंहस्थ 2016 के पहले श्रीमहंत हरिगिरीजी महाराज व्यवस्थाओं का जायजा लेने उज्जैन पहुंचे तो उन्होंने नीलगंगा सरोवर की दयनीय स्थिति को लेकर यहां पड़ाव डालने से मना कर दिया, तत्कालीन कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रीमहंत को आश्वासन दिया कि आपके सहयोग और प्रयासों से सरोवर का पुनरूद्धार किया जा सकता है और अल्प समय में सरोवर को स्वच्छ जल से भर दिया गया। सिंहस्थ महापर्व के पूर्व रामनवमी पर 13 अखाड़ों ने एक साथ इसी सरोवर में स्नान किया था।
यह होंगे कार्यक्रम
नीलगंगा सरोवर किनारे नवनिर्मित जूना अखाड़ा आश्रम में गंगा दशहरा और भवन लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें अखाड़ा परिषद अध्यक्ष सहित देशभर के 500 से अधिक साधु-संत सम्मिलित होंगे। दत्त अखाड़ा से कलश यात्रा प्रारंभ होगी जिसमें २१०० कलश यात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा पीठाधीश्वर महायोगी महामंडलेश्वर पायलट बाबा का पट्टाभिषेक कार्यक्रम भी किया जाएगा। इसके अलावा भजन, नृत्य नाटिका आदि कार्यक्रम भी होंगे। अनूप जलोटा की भजन संध्या भी होगी।
स्वयं प्रकट हुईं गंगा
नीलगंगा सरोवर गहरीकरण के दौरान यहां पानी सूख चुका था। चिंता थी कि सरोवर में पानी किस तरह आयेगा। गहरीकरण के दौरान सरोवर में पानी की धाराएं निकलीं और कुछ ही घंटों में करीब 5 फीट पानी एकत्रित हो गया। इसी सरोवर में अब साधु-संत गंगा दशहरे के अवसर पर स्नान करेंगे।हरिगिरी महाराज, राष्ट्रीय महामंत्री, अभा अखाड़ा परिषद