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2 साल बाद फिर सड़कों पर दौड़ेगी नगर निगम की 11 इंटरसिटी बसें
उज्जैन। २०१० में नगर निगम ने करोड़ो की लागत से ८९ सिटी बसे शहर की सुस्त पड़ी परिवहन व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए टाटा कंपनी के सांघी ब्रर्दस से खरीदा था। जिसमें ५० डीजल सिटी बसे बाहर शहरों में चलाने के लिए खरीदी गई थी। वहीं ३९ सीएनजी बसे शहर में यातायात को सुगम बनाने के लिए खरीदी थी। जो की कंपनी द्वारा सीमित मात्रा में बनाई गई थी, जिसके रिपेयरिंग पार्टस भी मार्केट में उपलब्ध नहीं हो रहे है। जिसके बाद २०१६ से इन बसों में से आदि से ज्यादा बसे पार्टस के अभाव में जंग खा रही है। वहीं पिछले वर्ष निगम ने ११ इंटरसिटी बसों के परमिट जारी करने के लिए आवेदन दिया था। जो कि १ साल के लंबे इंतजार बाद आरटीओ से जारी हुए है। ये बसे प्रदेश के अलग-अलग शहरों में यात्रियों के लिए चलाई जाएगी।
शहर की परिवहन व्यवस्था कई वर्षो से लाचार पड़ी हुई है, जिसका कारण निगम के द्वारा दिए गए स्पेशल आर्डर पर बनवाई गई सिटी बसे है। जिनको निगम ने खुद अपने हिसाब से डिजाईन करवा कर बनवाया था। जिसके पार्टस भी मार्केट में उपलब्ध नहीं है। निगम को जब मालूम था कि हम जिन सिटी बसों को खरीद कर बनवा रहे है। उनके पार्टस मार्केट में उपलब्ध नहीं है। तो उन्हे क्यों खरीदे। और जब इन बसों के टेंडर में शर्त थी कि इन बसों की रिपेयङ्क्षरग कंपनी निर्धारित समय तक कर सकती है।
उसके बावजूद भी नोटिस नहीं दिया गया। ना ही निगम ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए कानूनी कार्रवाई करना मुनासिब समझा। जिसके अभाव में ये बसे मक्सी रोड स्थिम बस डिपो मे जंग खा रही है। निगम द्वारा खरीदी गई ३९ सीएनजी सिटी बसों में से सिर्फ १८ बसे ही चल रही है। बाकि की बसे पार्टस के अभाव में जंग खाने को मजबूर है। वहीं ५० डीजल बसों में से १९ बसे प्रदेश के शहरों में चल रही है। जिसमें और ११ बसों के परमिट जारी कर दिए गए है। जो अब कुल ३० हो गई है। ये बसे भी पार्टस के अभाव में रिपेयर होने के बाद चलन में आएगी। जिनमें कुशन वाली सीटे लगाई जाएगी। क्योंकि अभी इन बसों में प्लास्टिक की सीटे लगी हुई है। जिनके टेंडर जारी कर दिए गए है।
कुशन की सीटें लगेंगी
हमने इन ११ बसों के सीटो के रिपेयरिंग के लिए नए टेंडर निकाल दिए है। इनमे यात्रियों की सुविधा के लिए कुशन वाली सीटे लगाई जाएगी उसके बाद ये बसे प्रदेश के शहरों में दौड़ेगी। जिसको जल्द से जल्द करने के निर्देश जारी कर दिए गए है।
मीना जोनवाल, महापौर