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- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
26/84 श्री सोमेश्वर महादेव
26/84 श्री सोमेश्वर महादेव :
प्राचीन कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति के श्राप के कारण चंद्रमा विलुप्त हो गये थे। चंद्रमा के विलुप्त होने से धरती पर औषधियां समाप्त होने लगी। इस पर देवताओं ने ब्रम्हा से प्रार्थना की। ब्रम्हा की आज्ञा पर समुद्र मंथन किया गया ओर एक चंद्रमा प्रकट हुआ। ब्रम्हा की आज्ञा से चंद्रमा धरती पर प्रजा का पालन करने लगा। श्राप ग्रस्त चंद्रमा ने भगवान विष्णु की आज्ञा से महाकाल वन में विराजित शिवलिंग की पूजा की ओर भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर पुनः अपना शरीर ओर राज प्राप्त किया। चंद्रमा के पूजन करने के कारण शिवलिंग का नाम सोमेश्वर महादेव पड़ा। मान्यता है कि यहां पूजन करने से मनुष्य सभी कलंको से मुक्त होता है ओर अंत काल में मोक्ष को प्राप्त करता है।