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37 साल से चिपके थे दोनों हाथ, जिला अस्पताल में डॅाक्टर ने ऐसे छुड़वाया
उज्जैन | ८ वर्ष की उम्र में आग में जलने से महिला के दोनों हाथ कोहनी से चिपक गए। कोहनी से मुड़े हुए हाथों को लेकर महिला ३७ साल तक जीवन की त्रासदी झेलती रही, जिसे गुरुवार को निजात मिली। फोड़े का मर्ज लेकर पहुंची महिला को जिला अस्पताल के डॉक्टर्स ने इस बीमारी से छुटकारा दिलाया। साथ ही जले हाथों को लेकर उसे समाज परिवार और समाज की भत्र्सना नहीं झेलना पड़े इसके लिए उसकी प्लास्टिक सर्जरी भी की गई।
जीरापुर निवासी संतोषबाई ने पति शिवलाल बैरागी ८ साल की उम्र में कपास में लगी आग से झुलस गई थी। दुर्घटना में उसके दोनों हाथ कोहनी से चिपक गए थे। संतोषबाई ने बताया कि परिजनों की आर्थिक हालत कमजोर होने से उन्होंने थोड़े दिन उपचार करवाया, लेकिन कोई फर्क नहीं पडऩे के कारण बंद कर दिया। सर्जरी का खर्च परिवार वाले वहन नहीं कर सकते थे, इसलिए इसी हाल में जीने को मजबूर थे। दोनों हाथ चिपके होने के कारण कामकाज करने में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता था। थोड़े दिन पहले पति ने ऑपरेशन के बारे में पता किया था, लेकिन खर्च अधिक आ रहा था। जिस वजह से ऑपरेशन नहीं करवा पाए। चार महीने पहले कोहनी के समीप फोड़ा हो गया। जिसके चलते जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टर ने जांच के बाद ऑपरेशन की बात कही। गुरुवार को ऑपरेशन किया।
काटना पड़ सकता था हाथ
डॉ. अजय दिवाकर ने बताया महिला को मोर्जूलिन अल्सर था। यह जले हुए हिस्से में ही होता है। जिसके बढऩे पर कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। मर्ज बढऩे पर हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। जिसके चलते कांट्रक्चर रिलीज सर्जरी की गई। इसके साथ ही महिला को चिपके हाथों की समस्या से निजात दिलाने के लिए रिकंस्ट्रक्शन विथ ग्राफ्टिंग सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद महिला के हाथ भद्दे नहीं दिखे इसके लिए झांघ की त्वचा निकालकर हाथ पर लगाई गई। पांच दिन बाद महिला की पट्टी खोली जाएगी और वह आम महिला जैसा जीवन-यापन करेगी। ऑपरेशन तीन घंटे तक चला। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ.वाय के चौहान ने इतने लंबे समय तक पेशेंट को स्टेबल रखा।
निजी अस्पताल में ५ लाख से अधिक खर्च, तीन बार ऑपरेशन
महिला की जो सर्जरी जिला अस्पताल में की गई। उसका निजी अस्पताल में खर्च पांच लाख से अधिक आता है। तीन बार में सर्जरी की जाती है। एक बार ड्रेसिंग का खर्च ही पांच हजार से अधिक आता है। जलने के बाद त्वचा चिपकने की समस्या अधिकांश केसेस में आती है, लेकिन महंगी सर्जरी के कारण वे इसी हाल में जीते हैं। महिला पूरी तरह से स्वस्थ है। डॉ. राजू निदारिया, सिविल सर्जन जिला अस्पताल