- बसंत पंचमी पर सांदीपनि आश्रम में विद्यारंभ संस्कार, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली में गूंजे पहले अक्षर
- बसंत पंचमी पर महाकाल दरबार पीले रंग में सजा, आज से होली तक रोज अर्पित होगा गुलाल
- महाकाल मंदिर में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; शेषनाग मुकुट और रजत मुण्ड माला में सजे बाबा महाकाल
- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
53/84 श्री विश्वेश्वर महादेव
53/84 श्री विश्वेश्वर महादेव
काफी समय पहले विदर्भ नगर में राजा विदुरथ थे। एक बार वे षिकार के लिए वन में गए। वहां उन्होनें मृग छाल पहनकर भगवान के ध्यान मग्न एक ब्राम्हण की हत्या कर दी। इस पाप के कारण वह 11 अलग – अलग योनियों में जन्म लेता रहा। 11 वीं योनि में वह चांडाल पैदा हुआ और धन चुराने के लिए एक ब्राम्हण के घर में घुसा और लोगों ने उसे पकड़ कर पेड़ पर टांग दिया। मरने के पूर्व तक चांडाल शूलेश्वर के उत्तर में स्थित एक शिवलिंग के दर्शन करता रहा। इस कारण वह मरने के बाद स्वर्ग में सुख भोगता रहा। इसके बाद पृथ्वी पर वह विदर्भ नगरी में ही राजा विष्वेष हुआ। उसे अपने पूर्व जन्म की कथा याद रही। वह अवंतिका नगरी में स्थित शिवलिंग पर पहुंचा और विधि विधान से भगवान का पूजन किया। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उससे वर मांगने के लिए कहा। राजा ने कहा कि इस संसार में किसी का भी पतन न हो और आपका नाम विष्वेश्वर के नाम से विख्यात हो। विष्वेष राजा को वरदान देने के कारण शिवलिंग विष्वेश्वर के नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है कि जो भी मनुष्य विष्वेश्वर महादेव के दर्शन करता है उसके सात जन्मों के पापों का नाष होता है।