- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
घाटों के बोरिंग से फव्वारों को जोड़कर साफ पानी से करा सकते है श्रद्धालुओं को स्नान
रामघाट के पंडे-पुजारी बोले- शिप्रा में साफ पानी आए तब तक यह व्यवस्था की जा सकती
उज्जैन-शिप्रा नदी में खान नदी का दूषित पानी मिलने से पानी दूषित और बदबूदार हो चुका है। शिप्रा में हजारों की संख्या में रोज श्रद्धालु स्नान, पूजन और आचमन करते हैं। दूषित पानी में स्नान से श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। रामघाट पर अनुष्ठान कराने वाले पंडों ने कहा कि प्रशासन जब तक खान नदी के दूषित पानी का निराकरण नहीं करता तब तक शिप्रा नदी आरती द्वार से छोटे पुल तक पूर्व से लगे 3 बोरिंग को फव्वारों से जोड़कर श्रद्धालुओं को स्नान करा सकता है।
मानसून सीजन में खान डायवर्शन को बंद कर उसमें आने वाले पानी को शिप्रा नदी में छोड़ा जाता है, लेकिन मानसून समाप्ती की घोषणा के बाद खान नदी के दूषित पानी को डायवर्सन के माध्यम से शिप्रा नदी में मिलने से रोका जाता है। इस वर्ष मानसून समाप्ती के बाद भी खान नदी का दूषित पानी लगातार शिप्रा नदी में मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डायवर्सन लाइन में गड़बड़ी के कारण उसमें पानी छोडऩा संभव नहीं और वर्तमान में खान नदी का दूषित पानी लगातार शिप्रा नदी में मिल रहा है।
जिसके कारण बारिश के दौरान शिप्रा नदी में एकत्रित हुआ साफ पानी भी दूषित हो गया और वर्तमान में शिप्रा नदी का पानी मटमैला होने के साथ बदबूदार भी हो चुका है। पीएचई अधीक्षण यंत्री धर्मेन्द्र वर्मा का कहना है कि नदी का पानी दूषित है और इसी कारण पानी को शहर में पेयजल सप्लाय के उपयोग में नहीं लिया जा रहा। पूरे शहर में गंभीर बांध से पेयजल सप्लाय हो रहा है। ऐसे में देशभर से उज्जैन दर्शन और शिप्रा नदी में स्नान के लिये आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के गंदे पानी में स्नान, पूजन, आचमन करना पड़ रहा है।
अब बदबू मारने लगा पानी-ठ्र्तमान में जो नदी का पानी मटमैला व बदबूदार हो चुका है। पानी से बदबू के झोंके आते हैं। जिला प्रशासन अथवा नगर निगम द्वारा नदी के दूषित पानी के निराकरण को बदलने के लिये कोई प्रयास नहीं किये जा रहे।
भीकूभाई हाड़ा, त्रिशूल वाला पंडा रामघाट
बोरिंग से फव्वारे चालू करें
रामघाट के शिप्रा आरती द्वार के पास, राणोजी की छत्री के सामने और मौलाना मौज की दरगाह के पास तीन स्थानों पर पहले से बोरिंग किये हुए हैं। इनमें मोटरें भी लगी है, एक बोरिंग की मोटर खराब है। तीनों बोरिंग को फव्वारों से जोड़कर श्रद्धालुओं के लिये स्नान की व्यवस्था की जाये तो नदी के दूषित पानी से श्रद्धालुओं को स्नान से रोका जा सकता है। आनंद गुरू, लोटावाला पंडा रामघाट
बाहर के लोग पूछते
यह कैसा पानी-शिप्रा नदी में स्नान, पूजन कार्य करने के लिये देश भर से लोग आते हैं, जब श्रद्धालु नदी में स्नान के लिये पहुंचते हैं तो गंदा व बदबूदार पानी देखकर पूछते हैं कि यह कैसा पानी हैं, इसमें स्नान कर भी सकते हैं या नहीं।
राजेश गुरू, मोरवाला पंडा रामघाट
अधिकारी करें समस्या का समाधान
प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों को नदी के गंदे पानी की समस्या का समाधान करना चाहिये, अभी बारिश सीजन समाप्त हुए कुछ समय ही बीता है और नदी का पानी दूषित हो गया आने वाले दिनों में समस्या बड़ी हो सकती है। गर्मी के दिनों में पानी की बड़ी समस्या रहती है।
पं. दीपक गुरु, त्रिशुल वाला पंडा रामघाट