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उज्जैन:अगले माह से नगर निगम की सिटी बसें चलाने की तैयारी
उज्जैन:इसे नगर निगम की कथित लाचारी कहें या समय का फेर…नगर निगम बस संचालन हेतु कंपनी बनाने के बाद भी बसों से लाभ नहीं कमा पा रही है। डिपो में खड़ी बसों को कंडम होने से बचाने के लिए एक बार फिर नगर निगम ने अपनी 50 बसों का टेंडर स्वीकृत कर दिया है। नगर निगम को इससे कोई लाभ तो नहीं होगा, उसकी बसों की लाइफ जरूर समाप्त होती चली जाएगी।
उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड नाम से नगर निगम ने सिटी बसों को चलाने के लिए कंपनी बनाई थी। कंपनी का काम बसों को चलाना और नगर निगम को इससे लाभ पहुंचाना था। इन बसों की आज की स्थिति इतनी दयनीय है कि इन्हे नगर निगम स्वयं न चलाते हुए मैंटेनेंस पर देकर, नाममात्र की राशि लेकर भी स्वयं को संतुष्ट समझ रहा है। ताजा मामला एकमात्र टेंडर को स्वीकृत करने का है। चूंकि तीसरी बार भी एक टेंडर आया, इसलिए इसे स्वीकृत कर दिया। निगम सूत्रों का दावा है कि जो टेंडर आया है, वह पुराने ठेकेदार का है, जिन्होंने अनेक समस्याएं बताकर बसों का संचालन बंद कर दिया था। अब जो टेंडर खुला है, उस अनुसार शहर में 20 एवं शहर के तहसीलों, जिलों में 30 बसों का संचालन ठेकेदार करेगा। मैंटेनेंस, चालक-परिचालक का वेतन, ईंधन, परमिट, बीमा का खर्च ठेकेदार वहन करेगा।
यह मिलेगा निगम को नगर निगम को प्रति बस ठेकेदार द्वारा 1651 रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा। यानी 50 बसों का कुल मासिक शुल्क 82 हजार 550 रुपए नगर निगम को आय के रूप में मिलेंगे।
इनका कहना है
सिटी बस का संचालन देख रहे निगम अधिकारी पवन कुमार के अनुसार बसों को खड़े रखकर कंडम होने से बचाने के लिए शर्तो के आधार पर ठेकेदार का टेंडर स्वीकृत हुआ है। इसे कंपनी बोर्ड की बैठक में औपचारिक रूप से स्वीकृत किया जाएगा। उन्होने बताया कि इससे बसों का संचालन और मैंटेनेंस तो होगा। निगम ने आय की अपेक्षा लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखा है।
यात्री बसें कब से चलेगी, कुछ पता नहीं…
शहर में यात्री बसों का संचालन कब से शुरू होगा, इसे लेकर अभी भी संशय है। बस ऑपरेटर्स का कहना है हमारी मांगों का निराकरण नहीं होने तक बसों का संचालन प्रारंभ नहीं करेंगे। आरटीओ संतोष मालवीय के अनुसार शासन के आदेश को हमने चस्पा करके बस ऑपरेटर्स को सूचित कर दिया था। वे बस नहीं चला रहे हैं, इस बात की जानकारी शासन को दे दी है। शासन से जो भी आदेश आएगा, वैसा करेंगे। फिलहाल नया आदेश नहीं आया है। अत: बात शासन और ऑपरेटर्स के बीच ही अंतिम रूप से तय होगी, कि बसों का संचालन कब से प्रारंभ हो।