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11वीं कक्षा के छात्र सिद्धार्थ चौहान ने तैयार किया अनूठा मॉडल, राष्ट्रीय विज्ञान मेले के लिए हुआ चयन
25 मिनट में 800 एमएएच बैटरी का मोबाइल फुल चार्ज
बार-बार मोबाइल चार्जिंग की परेशानी से जूझने पर शहर के एक छात्र ने सोलर एनर्जी से वायरलेस चार्जिंग की एक नई तकनीक का प्रयोग करते हुए मॉ़डल तैयार किया है। 11वीं कक्षा के इस छात्र के मॉडल को राज्य स्तरीय विज्ञान मेले में दूसरा स्थान मिला है आैर राष्ट्रीय विज्ञान मेले के लिए इस मॉडल का चयन किया गया है।
पुलिस कंट्रोल रूम के समीप लोकमित्र कॉलोनी में रहने वाले 11वीं कक्षा (गणित संकाय) के छात्र सिद्धार्थ चौहान ने वायरलेस चार्जर नाम से इस मॉडल को तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि बगैर बिजली के भी सोलर एनर्जी से निर्मित हुई इलेक्ट्रिसिटी से यह 800 एमएएच (मिली एम्पीयर अवर) की बैटरी को मात्र 20 से 25 मिनट में फुल चार्ज कर देता है। जिला स्तर पर चयनित होने के बाद जबलपुर में राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान एवं अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय मप्र में 21 व 22 नवंबर को हुए 29वें पश्चिम भारत विज्ञान मेले में इस मॉडल को प्रस्तुत किया गया। राज्य स्तरीय विज्ञान मेले में इस व्यक्तिगत मॉडल को दूसरा स्थान मिला। साथ ही 13 दिसंबर को मुंबई में होने वाले राष्ट्रीय विज्ञान मेले में भी इस मॉडल को प्रस्तुत करने के लिए चयन किया गया है। जबलपुर में हुए समारोह में मैपकास्ट सहित कई वैज्ञानिकों ने सिद्धार्थ को ट्रॉफी व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया।
ऐसे करता है काम
पीसीबी बोर्ड व कॉपर कॉइल को जोड़कर वायरलेस ट्रांसमीटर सिस्टम बनाया है, जिसमें सोलर प्लेट्स लगाई हैं। कॉपर कॉइल आैर सर्किट से मोबाइल को जोड़ने के लिए रिसीवर सिस्टम भी बनाया है, जिससे मोबाइल को वायरलेस सिस्टम से जोड़ा जा सके। धूप में ट्रांसमीटर सिस्टम को रखने पर उसमें लगी सोलर प्लेट्स सोलर एनर्जी को संग्रहित कर 320 एमएएच की रिचार्जेबल बैटरी तक पहुंचाती है। जिससे बैटरी चार्ज हो जाती है आैर इसे किसी भी समय मोबाइल को चार्ज करने में प्रयोग किया जा सकता है। सोलर प्लेट्स आैर कॉपर कॉइल व पीसीबी बोर्ड सोलर एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में कन्वर्ड करते हैं। कवरनुमा रिसीवर सिस्टम को मोबाइल पर लगाकर इसे पीसीबी बोर्ड व कॉपर कॉइल पर रख दिया जाता है। जिससे ट्रांसमीटर सिस्टम आैर रिसीवर सिस्टम के संपर्क में आते ही मोबाइल सीधे चार्ज होने लगता है।
पिता से बात करने में आती थी परेशानी, इसलिए तैयार किया
सिद्धार्थ के पिता प्रकाश चौहान घट्टिया थाने में हेड कांस्टेबल हैं। पिता से बात करने के दौरान कई बार बैटरी चार्ज नहीं होने से उन्हें परेशान होना पड़ता था। इसी कारण सिद्धार्थ को नया मॉडल तैयार करने की प्रेरणा मिली। सिद्धार्थ आैसत छात्र है। इस कारण कई बार उसे डांट भी पड़ी। जबलपुर में जब सिद्धार्थ का मॉडल चयनित किया तो खुशी से उसके आंसू निकल आए।