- उज्जैन में ‘स्कूल चलें हम’ अभियान की शुरुआत: तिलक लगाकर बच्चों का हुआ स्वागत, प्रवेश उत्सव में बांटी किताबें और साइकिल; कलेक्टर सहित अधिकारी पहुंचे स्कूल
- महाकाल के दरबार में बॉलीवुड सितारे: अक्षय कुमार, टाइगर श्रॉफ और डिंपल कपाड़िया ने किए दर्शन, नंदी के कान में कही मनोकामना
- वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन के साथ शुरू हुई भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण से साकार हुए महाकाल, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु!
- उज्जैन में महावीर जयंती पर भव्य शोभायात्रा: हजारों श्रद्धालु हुए शामिल, गूंजे ‘वीर प्रभु महावीर’ के जयकारे
- शेषनाग मुकुट और मोगरे के फूलों से सजे बाबा, भस्म आरती में दिखा दिव्य और अलौकिक स्वरूप
आज से छोटे होंगे दिन:बदल जाएगा दिन-रात का समय, 22 दिसंबर तक सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में डेढ़ घंटे का अंतर
23 सितंबर यानी वो दिन जब साल में एक बार दिन व रात बराबर होते हैं। आज से यानी 24 सितंबर से दिन छोटे होने लगेंगे। इस दौरान सूर्यास्त जल्द होता है और सूर्योदय देरी से। यह क्रम 22 दिसंबर तक चलता है। इस दिन के आते-आते दिन और रात में डेढ़ घंटे का अंतर हो जाता है।
जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि 22 दिसंबर को दिन सबसे छोटा 10.30 घंटे का होता है। रात सबसे ज्यादा लंबी 13.30 घंटे की होती है। 24 सितंबर से सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध में प्रवेश करने के बाद सूर्योदय अंश मात्र की देरी से और सूर्यास्त अंश मात्र जल्द होता है। हालांकि इसे घड़ी से नहीं मापा जाता। हमारे पंचांग इस मामले में सटीक जानकारी देते हैं। वे सूर्योदय और सूर्यास्त का वास्तविक समय बताते हैं।
सूर्य 23 सितंबर को विषुवत रेखा पर लंबवत होता है। इसे वेधशाला में लगे दो यंत्रों के माध्यम से समझा जा सकता है। शंकु यंत्र का ऊपरी सिरा विषुवत रेखा पर एक सीध में ही चलता है। अन्य दिनों में वह वक्रीय होता है। इसी तरह नाड़ी वलय यंत्र पर आज धूप नहीं गिरती। इसका उत्तरी व दक्षिणी गोलार्ध दोनों ही सिरों पर छांव रहती है।
किसी भी शहर में बना सकते हैं ये यंत्र
वेधशाला अधीक्षक डॉ. गुप्त ने कहा ये यंत्र किसी भी शहर में बनाए जा सकते हैं। इसके पहले हमें वहां की भौगोलिक स्थिति के बारे में बहुत ही सूक्ष्मता के साथ अध्ययन करना होगा। यह प्राकृतिक घटना है। इसे भौगोलिक के साथ गणितीय आधार पर भी समझना होगा। हमने मप्र के कुछ स्कूलों में इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। जल्द ही, वहां भी इस तरह के यंत्र लगाए जा सकेंगे।
गुप्त ने कहा कि उज्जैन कालगणना का केंद्र है, इसलिए वेधशाला में लगे सभी यंत्र तो हर जगह नहीं लगाए जा सकते लेकिन इनमें से कुछ यंत्रों को अन्य किसी भी शहर में स्थापित किया जा सकता है।
पिछल 9 दिन के सूर्योदय व सूर्यास्त के समय में आए अंतर को ऐसे समझ सकते हैं
दिन सूर्योदय (सुबह) सूर्यास्त (शाम)
15 सितंबर 6.19 6.30
16 सितंबर 6.14 6.29
17 सितंबर 6.14 6.28
18 सितंबर 6.14 6.27
19 सितंबर 6.15 6.26
20 सितंबर 6.15 6.25
21 सितंबर 6.16 6.24
22 सितंबर 6.16 6.23
23 सितंबर 6.16 6.22
24 सितंबर 6.16 6.21