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संजीवनी Hospital में तोडफ़ोड़ और मारपीट
बाइक फिसलने से गिरकर हुईं थीं घायल
शशिकला पति हजारीलाल उम्र 55 वर्ष निवासी नलिया बाखल पिछले रविवार को अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर देवास जा रही थीं। देवासरोड़ पर खुदाई होने के कारण बाइक फिसल जिससे गिरकर शशिकला कुशवाह घायल हुईं। परिजन पहले उन्हें अमलतास अस्पताल ले गये जहां प्रारंभिक उपचार के बाद शशिकला कुशवाह को संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया।
परिजनों ने बताया कि सिटी स्कैन के बाद डॉक्टर ने सिर में ब्लडिंग की बात कहकर एक साइड का ऑपरेशन किया लेकिन 48 घंटे बाद भी उन्हें होश नहीं आया। फिर दूसरी साइड का ऑपरेशन किया गया फिर भी शशिकला की हालत में सुधार नहीं हुआ।
परिजनों के अनुसार गले में ऑपरेशन कर नली डाली गई। मशीनों पर रखकर शशिकला के उपचार की बात कहते हुए कर्मचारी ज्यूस मंगाते लेकिन हमारे सामने नहीं देते थे। पिछले 7 दिनों में शशिकला के परिजन 8 लाख रुपये खर्च चुके थे बावजूद इसके उनकी हालत में सुधार नहीं होने के कारण परिजनों ने इंदौर ले जाने का निर्णय लिया।
बेटी बोली … मेरा तो सबकुछ उजड़ गया
शशिकला कुशवाह की बेटी सोनाली कुशवाह ने बताया कि छोटी सी दुर्घटना में मां घायल हुईं थीं। उनकी जान बचाने के लिये पिता ने कर्जा लिया और संजीवनी अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों के कहे अनुसार उपचार कराया।
डॉक्टर भी भरोसा देते रहे कि मां ठीक हो जाएंगी, 7 दिनों तक वह होश में नहीं आईं तो हमने इंदौर में और अच्छा उपचार कराने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें डिस्चार्ज कराने का कहा तो अस्पताल प्रबंधन ने मृत घोषित कर दिया साथ ही 80 हजार रुपये और मांग की गई। सोनाली ने कहा कि मेरा तो सबकुछ उजड़ गया और अस्पताल प्रबंधन शव देने के पहले रुपयों की मांग कर रहे हैं।
लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं हो रहा था हालत में सुधार- परिजन

शशिकला कुशवाह के परिजनों ने बताया कि सिर के दो ऑपरेशन होने, 8 लाख से अधिक रुपये खर्च होने के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो सोमवार सुबह अस्पताल प्रबंधन से इंदौर के अस्पताल ले जाने का कहकर डिस्चार्ज करने को कहा जिसके एक घंटे बाद अस्पताल प्रबंधन ने फोन पर शशिकला कुशवाह की मृत्यु की सूचना दी गई।
हेड इंज्यूरी में मरीज का बचना रहता है मुश्किल- डॉ. बंसल
संजीवनी अस्पताल संचालक डॉ. राजेन्द्र बंसल ने बताया कि महिला को दूसरे अस्पताल से लेकर परिजन आये थे। हेड इंज्यूरी के मरीजों का बचना मुश्किल होता है। महिला का उपचार डॉ. रूपेश खत्री कर रहे थे। फिर भी अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को बचाने के हर संभव प्रयास किये।
