- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
महाशिवरात्रि के बाद सोमवती अमावस्या, तीस साल बाद संयोग
शिप्रा और सोमकुंड में श्रद्धालु करेंगे स्नान मिलती है पुण्य की प्राप्ति
उज्जैन। महाशिवरात्रि के बाद सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। हजारों श्रद्धालु धार्मिक नगरी में आएंगे और मोक्षदायिनी शिप्रा के साथ ही सोमेश्वर कुंड में भी स्नान के साथ ही सोमेश्वर महादेव का पूजन करेंगे।
शनिवार 18 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। दूसरे दिन बाबा महाकाल के सेहरा दर्शन और दिन में भस्मारती होगी। इसके बाद सोमवार को सोमवती अमावस्या का पर्व हैं। इस कारण तीन दिन तक शहर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। इससे प्रशासन को भी विशेष इंतजाम करना पड़ेंगे।
इधर ज्योतिषियों के अनुसार 30 साल बाद कुंभ राशि के चंद्र, शनि और सूर्य की साक्षी में सोमवती अमावस्या आ रही है। इस दिन शिप्रा व सोमकुंड में स्नान तथा सोमतीर्थ स्थित सोमेश्वर महादेव के पूजन का विधान है। मान्यता है ऐसा करने से मनुष्य को अवश्वमेघ यज्ञ करने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस अमावस्या पर सोमवार का दिन धनिष्ठा नक्षत्र परिघ योग उपरांत शिवयोग, नाग करण तथा कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी रहेगी।
पीपल की परिक्रमा करती हैं महिलाएं
इस साल की पहली सोमवती अमावस्या 20 फरवरी को है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित स्त्रियां पति की लंबी उम्र के लिए कामना करते हुए रखती है। व्रत रखने के साथ साथ पीपल के पेड़ की परिक्रमा भी करती है।
अन्य अमावस्या की तुलना में सोमवती अमावस्या का अधिक महत्व है। यदि किसी पर पितृ दोष है तो इस दिन स्नान दान करने से मुक्ति मिलती है। साथ ही कालसर्प दोष से पीडि़त व्यक्तियों को भी इस दिन दान करना चाहिए। सोमवती अमावस्या का आरंभ 20 फरवरी को सुबह 11 बजकर 4 मिनट से होगा और 21 फरवरी को सुबह 6: 55 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त हो जाएगी।