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कार्तिक पूर्णिमा का पर्व स्नान 27 नवंबर को, शिप्रा नदी से निकाला डंपरभर कचरा
चित्र मोक्षदायिनी शिप्रा नदी किनारे, छोटे पुल के पूर्वी छोर का है जहां शनिवार सुबह नदी से निकाला डंपरभर कचरा घंटों पड़ा रहा। इसे देख लोगों ने मुंह फेरा, नाक सिकोड़ी और भरे मन से इतना ही कहा कि ‘ये कचरा व्यवस्था और आवश्यकता के बीच फर्क बता रहा है। स्पष्ट है स्वच्छता के प्रति कुछ लोग अब भी जागरूक नहीं हुए हैं।’
कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आएंगे
मालूम हो कि 27 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व स्नान है। जिलेभर से इस दिन श्रद्धालुओं के शिप्रा नदी में स्नान करने आने का अनुमान है। लोग स्वच्छ जल में स्नान करें, इसके लिए नगर निगम ने रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट की सफाई कराई है। शिप्रा नदी में जमा कचरा बाहर निकलवाया है। इस कार्रवाई में दो स्तर पर चूक देखने को मिली।
फिर नदी में कैसे फेंक दिया कचरा
पहली, घाट पर कचरा पेटी, होमगार्ड के जवान और निगमकर्मियों के होते लोगों ने नदी में कचरा कैसे फेंक दिया। दूसरा, कचरा नदी से निकाला तो उसे तत्काल उठवाकर यथोचित स्थान क्यों नहीं फेंका गया। प्रत्यक्षदर्शियाें ने कचरा देख कहा कि उज्जैन धार्मिक पर्यटन नगरी है।
उज्जैन में पर्यटकों की संख्या 10 गुना बढ़ी
श्री महाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या 10 गुना बढ़ गई है। ऐसे में पर्यटक तीर्थ क्षेत्र में कचरा देखेंगे तो शहर की क्या छवि लेकर जाएंगे। जिम्मेदारी प्रशासन के साथ हर एक नागरिक को उठाना चाहिए। लोगों को ये समझना जरूरी है कि स्वच्छता से ही शहर की ताकत बढ़ेगी। शहर स्वच्छ होगा तो लोग स्वस्थ रहेंगे। लोग स्वस्थ रहेंगे तो वे बेहतर काम कर पाएंगे। और ऐसा हुआ तो ही सच्चे अर्थों में शहर का विकास हो पाएगा।