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उज्जैन में मुन्ना भाई MBBS की गैंग सक्रिय! 10वीं-12वीं प्री-बोर्ड के पेपर 2 घंटे पहले लीक, सोशल मीडिया पर हुए वायरल; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक गंभीर और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की कक्षा 10वीं और 12वीं प्री-बोर्ड परीक्षा के पेपर सोशल मीडिया पर लीक हो गए, और यह मामला पूरी तरह से हैरान कर देने वाला है।
जानकारी के लिए बता दें, 21 जनवरी यानी कि आज 12वीं कक्षा का बायोलॉजी पेपर था, लेकिन वह परीक्षा से दो घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर लीक हो गया। एक मीडिया संगठन ने जब कुछ सरकारी स्कूलों का दौरा किया, तो 11 बजे पेपर बांटे जाने के बाद, उन्होंने देखा कि वह पेपर हूबहू वही था जो पहले ही लीक हो चुका था।
इसी तरह से सोमवार को अंग्रेजी का पेपर 11 बजे शुरू हुआ, लेकिन वह परीक्षा से 6 घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर लीक हो गया था। फिर मंगलवार को होने वाले गणित के पेपर की बात करें, तो वह भी 21 घंटे पहले ही छात्रों के हाथ में आ गया। बता दें, कुछ पेपर दो दिन पहले और कुछ एक दिन पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो गए।
21 जनवरी को होने वाली 12वीं कक्षा का बायोलॉजी का पेपर तो परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर था। यही नहीं, इंग्लिश और गणित के पेपर भी परीक्षा से पहले ही छात्रों के पास पहुंच गए थे। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी थी, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि जब इस मामले की गहनता से जांच की गई, तो पाया गया कि कई सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसे “Munna bhai yt”, “Mp bord official”, “Sdlclasses” पर ये पेपर और उनके सॉल्यूशंस पोस्ट किए गए थे।
मामले में शहर के एक 12वीं कक्षा के छात्र ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि 16 जनवरी को उसका पहला पेपर था। एग्जाम देने के बाद जब वह बाहर निकला, तो स्कूल में दोस्तों ने बताया कि पेपर एक दिन पहले ही टेलीग्राम पर लीक हो चुका था। इसके बाद उसे भी टेलीग्राम की लिंक के जरिए पेपर की जानकारी मिल गई। छात्र के अनुसार, 17 जनवरी को हिंदी का पेपर और 20 जनवरी को गणित का पेपर भी लीक हो गए थे। ये सभी पेपर टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए थे।
कौन है जिम्मेदार?
मध्य प्रदेश बोर्ड के विमर्श पोर्टल पर पेपर एक दिन पहले ही अपलोड कर दिए जाते हैं, और इनका लॉगिन पासवर्ड प्रिंसिपल के पास होता है। प्रिंसिपल इसे खोलकर इसकी फोटो कॉपी करवाकर पेपर वाले दिन इसे बच्चों को बांट देते हैं। पेपर लीक मामले ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली और उसकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घोटाले में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा?