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फ्रीगंज का हर कट चौक सात करोड़ का, नगर निगम को मिलते हैं रोज 700 रुपए
उज्जैन । 90 साल पहले स्मार्ट सिटी की तरह बसाए गए फ्रीगंज में ट्रैफिक का इतना दबाव बढ़ गया है कि ढूंढने के बाद भी गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं मिलती। फ्रीगंज की प्लानिंग में पार्किंग के लिए कट चौक भी बनाए गए लेकिन अधिकतर को अतिक्रमण ने खत्म कर दिया है। सरकारी जमीन पर रखी गुमटियां पूरे सिस्टम पर भारी पड़ रही हैं। फ्रीगंज क्षेत्र के कारोबारी भी मानते हैं कि कट चौक अतिक्रमण से मुक्त हो जाए तो पार्किंग की समस्या ही खत्म हो जाए।
फ्रीगंज की बसाहट 1935 की है। तब योजनाकारों ने चौड़ी सड़कें, पोर्च, पार्किंग के लिए कट चौक और पैदल आवागमन के लिए गलियों का निर्माण किया था। पोर्च में दुकानदारों का कब्जा है, गलियों में रहवासियों व व्यापारियों ने निर्माण कर लिए, कट चौक में गुमटियां लग गईं। सड़कों पर ठेले वालों ने कब्जा कर लिया। नतीजतन उस समय की स्मार्ट सिटी का स्वरूप ही बिगड़ गया। फ्रीगंज में कुल सात कट चौक हैं। प्रत्येक कट चौक के कोने पर 2500 वर्ग फीट जमीन छोड़ी थी। मौजूदा गाइड लाइन से हिसाब लगाया जाए तो इस जमीन की कीमत होती है 7 करोड़ रुपए। गुमटियों से निगम को रोज 700 रुपए भी दांडिक शुल्क यानी बाजार वसूली के रूप में नहीं मिलते। निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 2300 करोड़ रुपए की योजनाएं बनाई है, लेकिन इस पुरानी स्मार्ट सिटी को बचाने के लिए तैयार नहीं है। फ्रीगंज की श्री भू-भवन स्वामी एसो. अध्यक्ष विक्रम चित्तोड़ा के अनुसार पोर्च का मसला उलझा हुआ है। कट चौक व गलियों पर कब्जे हैं। निगम सभी को विश्वास में लेकर फ्रीगंज को फिर स्मार्ट बना सकता है।
फ्रीगंज में कट चौक पर ज्यादा अतिक्रमण नहीं हैं। उन्हें खाली कराया जाएगा। यहां वाहन पार्किंग होगी। सड़कों पर से भी अस्थायी अतिक्रमण हटाएंगे। आशीषसिंह, आयुक्त ननि
गुमटी मालिक को 500, निगम को 15 रु.
फ्रीगंज के कट चौक व अन्य सड़कों पर रखी स्थायी गुमटियां किराए पर भी चल रही हैं। रोज 500 से 2000 रुपए किराया गुमटी मालिक लेता है। निगम को गुमटी रखने के एवज में 15 रुपए प्रति गुमटी मिलते हैं। यानी गुमटी को अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। कट चौक में कुछ बंगाली समाज की गुमटियां हैं, जिन्हें बंगाल से विस्थापित होकर आने पर रोजगार के लिए दी थीं।
4700 रुपए रोज होती है वसूली
फ्रीगंज में 48 स्थायी गुमटियां हैं। ये टॉवर के आसपास, मोहन मेंशन की गली, शिवमंदिर चौराहा, सांदीपनि कॉलेज चौराहा, कंट्रोल रूम के सामने, मुंज मार्ग,अलखधाम मंदिर के पास, ऑटो स्टैंड के पास रखी हैं। 200 से ज्यादा ठेले हैं। निगम की सूची में स्थायी और अस्थायी 313 गुमटी ठेले दर्ज हैं। इन से रोज निगम 10 से 15 रुपए की वसूली करता है। औसत 4700 रुपए रोज इनसे आय है।