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महाकाल के पुजारी ने उठाया बड़ा कदम – ‘शाही’ और ‘पेशवाई’ शब्दों को हटाने की मांग: बोले – ‘गुलामी के प्रतीक’ शब्दों को हटाया जाए
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन, महाकाल की पवित्र नगरी, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं, और इस नगर की धरती पर भगवान महाकाल के दर्शन पाकर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। लेकिन यहाँ आगामी सिंहस्थ कुंभ के मद्देनजर कई बदलाव हो रहे हैं। प्रयागराज कुंभ से सीखा गया अनुभव अब उज्जैन में भी लागू होने जा रहा है। इस बार क्राउड मैनेजमेंट, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षित यात्रा जैसे हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है।
लेकिन केवल क्राउड मैनेजमेंट ही नहीं, इस बार उज्जैन में धार्मिक परंपराओं में भी बदलाव की हवा बह रही है। प्रयागराज कुंभ की तरह, ‘शाही’ शब्द को हटाकर एक नया शब्द ‘अमृत स्नान’ का इस्तेमाल किया गया था। अब उज्जैन महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने भी कुछ ऐतिहासिक शब्दों को बदलने की मांग की है।
पुजारी महेश शर्मा ने कहा कि, “प्रयागराज में ‘शाही स्नान’ का नाम बदलकर ‘अमृत स्नान’ किया गया था। हम चाहते हैं कि यही बदलाव उज्जैन में भी हो। ‘शाही’ शब्द हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह मुग़ल काल का प्रतीक है। हमें ऐसे शब्दों से मुक्ति चाहिए जो गुलामी के इतिहास को याद दिलाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि ‘पेशवाई’ और ‘छावनी’ जैसे शब्दों से भी मुक्ति मिले, क्योंकि छावनी जैसे अन्य नाम अंग्रेजों के शासन काल की याद दिलाते हैं, यह गुलामी का प्रतीक है। इसी तरह पेशवाई मराठा कालीन नाम है।
जानकारी के लिए बता दें, 2024 के सावन भादौ माह में होने वाली शाही और अंतिम सवारी के नाम में ‘शाही’ शब्द को लेकर कुछ विवाद उठ खड़ा हुआ था, क्योंकि इसे मुगल काल से जोड़ा गया था। इसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश सरकार ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें अंतिम सवारी का नाम बदलकर ‘राजसी सवारी’ कर दिया गया। इसके बाद हर जगह उद्घोषणा में इसे भगवान महाकाल की अंतिम राजसी सवारी के रूप में पेश किया गया।