बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

बसंत पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष 23 जनवरी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। उज्जैन में इस पर्व की शुरुआत परंपरा अनुसार भगवान महाकाल के आंगन से होगी। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन से ही महाकाल की नगरी में होली पर्व का आध्यात्मिक आगाज़ हो जाता है।

ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती के साथ बसंत उत्सव की शुरुआत होगी। इस अवसर पर भगवान महाकाल को पीले वस्त्र, पीले पुष्प और गुलाल अर्पित किए जाएंगे। मंदिर परिसर पूरी तरह वासंती रंग में रंगा नजर आएगा।

महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन भगवान महाकाल का केसर युक्त पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद पीले वस्त्र धारण कराकर भगवान का बसंती पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। पूजा-अर्चना में सरसों के पीले फूल और गुलाल अर्पित किया जाएगा।

महाकाल मंदिर के महेश पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बसंत पंचमी से लेकर होली पर्व तक, मंदिर की नित्य आरतियों में भगवान को गुलाल अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसे बसंत ऋतु के स्वागत के रूप में मनाया जाता है।

ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती से लेकर रात में होने वाली शयन आरती तक, दिनभर की सभी पांचों आरतियों में बसंत पंचमी का उत्साह देखने को मिलेगा।

सांदीपनि आश्रम में भी बसंत पंचमी के विशेष आयोजन

बसंत पंचमी के अवसर पर सांदीपनि आश्रम में भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यहां भगवान श्रीकृष्ण का केसर युक्त जल से अभिषेक कर उन्हें पीले वस्त्र धारण कराए जाएंगे। भगवान को केसरिया भात का भोग अर्पित किया जाएगा तथा सरसों के पीले फूल और वासंती गुलाल चढ़ाया जाएगा।

सांदीपनि आश्रम वह पवित्र स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरुकुल जीवन में शिक्षा ग्रहण की थी। इसी परंपरा के निर्वहन में बसंत पंचमी के दिन विद्या आरंभ संस्कार भी संपन्न कराया जाएगा। पहली बार पढ़ाई शुरू करने वाले बच्चों का पाटी (स्लेट) पूजन कराकर उन्हें शिक्षा के पथ पर आगे बढ़ाया जाएगा।

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