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संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
शिप्रा नदी के तट पर स्थित संत शिरोमणि रविदास घाट रविवार को सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सामाजिक समरसता मंच द्वारा यहां एक भव्य आयोजन का साक्षी बना उज्जैन, जहां धर्म, समाज और संस्कृति की धाराएं एक साथ प्रवाहित होती नजर आईं।
यह आयोजन उज्जैन में अपनी प्रकृति का विशिष्ट कार्यक्रम रहा, जिसमें संत समाज के साथ-साथ शहर के 100 से अधिक समाजों के प्रमुखों ने एक मंच साझा करते हुए सामाजिक एकता और समरसता का स्पष्ट संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ “समरसता गीत – संस्कृति एक चिरंतर” की भावनात्मक प्रस्तुति से हुआ। अंतर्राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना एवं ‘प्रिंसेस ऑफ कथक’ के रूप में पहचान बना चुकीं डॉ. खुशबू पांचाल की शिष्याओं ने कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति के माध्यम से सांस्कृतिक एकता और समरसता की भावना को मंच पर सजीव किया।
इस प्रस्तुति में प्रियंका शुक्ला, पूर्वा भालेराव, देवयानी गौड़, ख्याति पाटीदार, याशी गर्ग, सृष्टि निखार, परिधि तोमर, लक्षिता मरमट, श्रुति स्वर्णकार, अनाया स्वर्णकार, अर्चना मधुराज एवं कृतिका जायसवाल ने सहभागिता की।
दीप प्रज्वलन से हुआ औपचारिक शुभारंभ
सांस्कृतिक कार्यक्रम के पश्चात अतिथियों ने संत शिरोमणि रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलन किया, जिसके साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
संत समाज की गरिमामयी सहभागिता
आयोजन में विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों और मंदिरों से पधारे संत-महात्माओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रमुख रूप से महामंडलेश्वर शान्ति स्वरूपानन्द महाराज (चारधाम), महंत महावीर नाथ (ऋणमुक्तेश्वर), महंत रामानन्द महाराज, महंत भवानीदास महाराज, महंत गजानन्द सरस्वती महाराज, महंत सेवा नन्दगिरी , स्वामी अमर गिरि महाराज, अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी परमानन्द महाराज, महंत चरणदास महाराज एवं महंत राधेश्यामदास महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संत रविदास के विचारों पर विमर्श
महामंडलेश्वर शान्ति स्वरूपानन्द जी महाराज ने अपने संबोधन में संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन दर्शन और सामाजिक समरसता के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं महंत श्री महावीर नाथ जी महाराज ने संत रविदास के विचारों को वर्तमान समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए समानता और एकता के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख श्री प्रवीण जी गुप्त रहे।
100 से अधिक समाजों की सहभागिता
मंचासीन संतों एवं वक्ताओं का सम्मान कार्यक्रम संयोजक धर्मेंद्र सिंह परिहार एवं सह-संयोजक ओमप्रकाश मोहने द्वारा समाज प्रमुखों के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर उज्जैन महानगर के 100 से अधिक समाजों की सहभागिता देखने को मिली, जिसने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।
2121 दीपकों से आलोकित हुआ शिप्रा तट
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी संतों और समाज प्रमुखों द्वारा सामूहिक रूप से संत शिरोमणि रविदास जी की आरती की गई। इसके पश्चात मंदिर एवं घाट परिसर को 2121 दीपकों से सजाया गया, जिससे शिप्रा तट का संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकाश से जगमगा उठा।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रान्त सहकार्यवाह रघुवीर सिंह सिसोदिया, मालवा प्रान्त सामाजिक समरसता संयोजक मुकेश दिसावल, प्रांत सह संयोजक धर्मेंद्र मौर्य एवं शेखर दिसावल की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में सामाजिक समरसता मंच की ओर से सह-संयोजक जयश्री गिरी ने सभी अतिथियों और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।