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81/84 श्री पिंगलेश्वर महादेव
81/84 श्री पिंगलेश्वर महादेव
एक बार मां पार्वती ने शिवजी से पृथ्वी पर उत्तम स्थान को देखने की बात कही। शिवजी उन्हे महाकाल वन लाए और बताया कि यह स्थान तीनो लोको में स्र्वोत्तम है पार्वती के कहने पर भगवान शंकर ने चार दिशाओं में चार द्वार बानये ओर द्वारपालो की स्थापना की शिवजी ने पूर्व दिशा में पिंगलेश्वर दक्षिण में कायवरोहणेश्वर उत्तर में विश्वेश्वर ओर पश्चिम में दुर्दश्वर की स्थापना की शिव ने गणो को आज्ञा दी की जो भी मनुष्य इस क्षेत्र में मृत्यु को प्राप्त हो वे उसकी रक्षा करें। इसके बाद भगवन शिव ने पार्वती को पिंगलेश्वर की कथा बताई । कान्यकुब्ज नगर में एक कन्या थी जिसका नाम था पिंगला वह अत्यंत सुंदर थी पिता विपेन्द्र पिंगल धर्म ओर वेंद के ज्ञाता थे एक बार उनकी पत्नी मृत्यु को प्राप्त हो गई विपेन्द्र घर छोडकर बेटी का भी रक्षण करने लगा एक दिन उसकी भी मृत्यु हो गई पिता की मृत्यु से पिंगला दुखी हो गई ओर रूदन करने लगी धर्मराज ब्राम्हण का रूप लेकर आये ओर उसे बताया कि यह दुख तुम्हे पिछले जन्म के कर्माे के कारण हो रहा है। पिछले जन्म में भी तुम अंत्यत सुदंर थी ओर वैश्यावृत्ति करती थी एक ब्राम्हण तुम्हारे रूप के वशीभूत होकर साथ रहता था। तुम्हारे साथ रहने के लिए अपनी पत्नी का त्याग कर दिया था। एक दिन एक शूद्र ने घर में उस ब्राम्हण की हत्या कर दी उस ब्राम्हण के माता पिता ने तुम्हे श्राप दिया की तुम पिता वियोग सहोगी ओर पति को प्राप्त नही करोगी। पिंगला ने उनसे पूछा कि वह ब्राम्हण जन्म मे कैसे हुई धर्मराज ने बाताया कि एक बार वासना से पीडित एक ब्राम्हण को राजा ने बंधक बना लिया उस ब्राम्हण को तुमने बंधन से छुडाया ओर घर ले आई उस ब्राम्हण के साथ रहने के कारण तुम्हे इस जन्म में ब्राम्हण का जन्म मिला पिंगला ने पूछा अब उसे मुक्ति केसे प्राप्त होगी। धर्मराज ने बताया कि आंवतिका में महाकाल वन में पूर्व दिशा मे शिवलिंग का दर्शन करों उससे तुम्हारी मनोकामनाए पूर्ण होगी पिंगला महाकाल वन आई ओर यहां शिवलिंग के दर्शन कर देह को त्याग ओर शिवलिंग में लीन हो गई । पिंगला के मुक्ति से शिवलिंग का नाम पिंगलेश्वर हुआ। मान्यता है कि जो भी मनुष्य पिंगलेश्वर महादेव के दर्शन करेगा उसके घर में सदा धर्म और धन निवास करेगें ओर अंतकाल में स्वर्ग को प्राप्त करेगा।