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- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
59/84 श्री सिद्धेश्वर महादेव
59/84 श्री सिद्धेश्वर महादेव
काफी समय पूर्व अश्वशिरा नाम का एक राजा था। वह बड़ा ही धार्मिक ओर प्रजा पालक था। राजा यज्ञ अनुष्ठान कर राजा ने सिद्धि को प्राप्त किया था। एक बार उसके राज्य में कपिल मुनि ओर जैगीषव्य ऋषि का आगमन हुआ। राजा ने उनका सम्मान किया ओर उनसे पूछा कि उसने सुना है कि भगवान विष्णु सर्वश्रेष्ठ है ओर उनके दर्शन ओर उनकी कृपा से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त करता है। फिर ऐसे भगवान विष्णु को कोई प्रणाम क्यों नही करता है। दोनों ऋषियों ने राजा से पूछा कि यह बात तुमसे किसने कही है। उन्होने अपनी सिद्धि से राजा को उसकी राज्यसभा में भगवान के साथ संपूर्ण सृष्टि के दर्शन कराए। राजा ने कहां कि में आपकी सिद्धि को देखकर आश्चर्यचकित हूं। इस प्रकार की सिद्धि कैसे प्राप्त होगी। आप मुझे बताएं। राजा के वचन सुनकर दोनो मुनियों ने कहा कि राजन आप महाकाल वन में सौभाग्येश्वर महादेव का पूजन करें तो आपको आलौकिक सिद्धि प्राप्त होगी। मुनियो की बात सुनकर राजा तुरंत आवंतिका नगरी आया ओर यहा दोनो मुनियों को देखा। राजा ने लिंग के मध्य भाग में भगवान विष्णु को बैठे देखा। इसके बाद राजा ने शिवलिंग का पूजन किया । सिद्धेश्वर महादेव ने उससे प्रसन्न होकर वरदान मांगने के लिए कहा। राजा ने कहा कि आपके दर्शन की इच्छा थी वह पूर्ण होगी। इस प्रकार राजा ने सिद्धि प्राप्त की और विष्णु रूप में शिवलिंग में लीन हो गया। मान्यता है कि जो भी मनुष्य सिद्धेश्वर के दर्शन करता है वह विभिन्न सिद्धियों को प्राप्त करता है ओर अंतकाल में मोक्ष को प्राप्त करता है।