- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
नीट पीजी में शुभम की ऑल इंडिया में 85 वीं रैंक, पिता हैं किसान
उज्जैन / बडऩगर | नगर के एक 23 वर्षीय डॉक्टर ने ऑल इंडिया स्तरीय नीट पीजी की परीक्षा में 99.93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में 85वीं रैंक प्राप्त की है। परीक्षा में देश के 1 लाख 29917 डॉक्टर शामिल हुए थे। यह छात्र 10 वर्ष की उम्र में गंभीर बीमारी से लड़ा और 1 माह आईसीयू में रहने के बाद 6 माह बाद चलने लायक हुआ। बीमारी के समय ही उसने डॉक्टर बनने का प्रण लिया था। हम बात कर रहे हैं नगर के शांति निकेतन मार्ग पर रहने वाले शुभम पिता प्रवीण खटौड़ की। शुभम के पिता किसान हैं। शुभम ने कक्षा छह से दसवीं तक की शिक्षा नगर में ली। इसके बाद ११वीं व १२वीं की पढ़ाई इंदौर में की और पीएमटी पास कर एमबीबीएस के लिए जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज का चयन किया। शुभम ने हाल ही में घोषित नीट पीजी की परीक्षा में 85वीं रैंक प्राप्त कर जबलपुर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में प्रथम स्थान प्राप्त कर बडऩगर का नाम गौरवान्वित किया है।
10 वर्ष की उम्र में लिया था प्रण
शुभम ने पत्रिका को बताया 10 वर्ष की उम्र में वह गुलेनबेरी सिंड्रोम नामक बीमारी से ग्रसित हो गया था। यह बीमारी पैरों की मांसपेशी से लेकर श्वसन तक प्रभावित करती है। बीमारी के कारण एक माह आईसीयू में भर्ती रहा और छह माह तक बिस्तर पर रहने के बाद पुन: चलना शुरू किया। बीमारी से ग्रसित रहते हुए ही डॉक्टर बनने का प्रण लिया था। शुभम ने बताया पीएमटी एवं नीट की तैयारी में उसने रोज 18-18 घंटे पढ़ाई की। दोनों ही परीक्षाओं में पहले प्रयास में सफलता हासिल की।
सफलता का श्रेय माता-पिता को
शुभम का कहना है माता-पिता ने उसे हमेशा मेहनत करने की प्रेरणा देते हुए सदैव पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया। उन्ही के मार्गदर्शन के कारण यह सफलता प्राप्त हुई है। वह अब अब आगे दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेेज से एमडी रेडियोडाइग्नोसिस या एमडी मेडिसिन करना चाहता है।