- महाकाल दरबार पहुंचे सुनील शेट्टी, परिवार के साथ शांत माहौल में किए दर्शन; Border-2 की सफलता के लिए मांगा आशीर्वाद
- सभा मंडप से गर्भगृह तक अनुष्ठानों की श्रृंखला, भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में हुए महाकाल के दर्शन; जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत मुकुट और शेषनाग श्रृंगार के साथ खुले मंदिर के पट
- महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए अभिनेता मेका श्रीकांत, नंदी हॉल में बैठकर किया जाप
- श्री महाकालेश्वर मंदिर में दिव्य भस्म आरती सम्पन्न: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधि-विधान से हुआ पूजन, राजा स्वरूप में बाबा महाकाल दिए दर्शन!
- उज्जैन में मानवता की मिसाल, शिप्रा आरती के दौरान बिछड़ी बुजुर्ग महिला को उज्जैन पुलिस ने 6 घंटे में ढूंढ निकाला!
भगदड़ से सबक या परंपरा का अंत? Simhastha 2028: VIP एंट्री बैन, पेशवाई बंद, पुजारी महासंघ ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र; सरकार के फैसले पर टिकी सबकी निगाह!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
सिंहस्थ 2028! उज्जैन का महापर्व! करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, संतों का जमावड़ा और क्षिप्रा के पवित्र तट पर पुण्य की डुबकी! लेकिन… क्या इस बार आस्था की परीक्षा होगी? क्या सिंहस्थ में परंपराएं बदलेंगी? क्या संतों का शाही स्नान इतिहास बन जाएगा?
दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ और हादसे के बाद अब उज्जैन सिंहस्थ 2028 पर सवाल उठने लगे हैं! और इस बार अखाड़ों की पेशवाई को लेकर घमासान मचा हुआ है।
जानकारी के लिए बता दें, प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ और हादसे के बाद, अब उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर चिंता बढ़ गई है, साथ ही सिंहस्थ कुंभ 2028 को लेकर धार्मिक और प्रशासनिक माहौल गरमा गया है!
जिसके बाद अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक सख्त सुझाव पत्र भेजा है, जिसमें सिंहस्थ में अखाड़ों की पेशवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही सिंहस्थ 2028 में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि सभी श्रद्धालुओं के साथ समान व्यवहार किया जाए।
परंपरा के अनुसार, जब अखाड़ों के संत और नागा बाबा शाही अंदाज में क्षिप्रा के रामघाट पर स्नान करने पहुंचते हैं, तो लाखों श्रद्धालुओं को पीछे रोक दिया जाता है। इस दौरान घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जाती है, जिससे भगदड़ और हादसों की संभावना बढ़ जाती है। महासंघ ने सुझाव दिया है कि इस बार अखाड़ों की पेशवाई को पूरी तरह से बंद कर दिया जाए और संतों को साधारण रूप से स्नान करने भेजा जाए। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि क्षिप्रा के हर घाट को रामघाट की तरह पवित्र माना जाता है, ऐसे में सभी तेरह अखाड़ों के लिए अलग-अलग घाट निर्धारित किए जाएं। इससे घाटों पर भीड़ नहीं बढ़ेगी, स्नान सुगमता से होगा और भगदड़ जैसी घटनाओं से बचा जा सकेगा।
महासंघ ने मांग की है कि मेला क्षेत्र में सभी वीआईपी और वीवीआईपी को प्रतिबंधित किया जाए ताकि आम भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा, रामघाट पर सर्वप्रथम केवल चारों शंकराचार्यों को ही स्नान की अनुमति दी जानी चाहिए, बाकी अखाड़ों को नहीं।
अब फैसला सरकार के हाथ में है! लेकिन इस फैसले से करोड़ों आस्थाओं का भविष्य जुड़ा है! अगर सरकार ने इन सुझावों को लागू किया, तो सिंहस्थ 2028 सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय आयोजन बनेगा, जिसमें न अव्यवस्था होगी और न ही भगदड़। सवाल यह है कि क्या सरकार इन सुझावों को मानेगी? या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा? तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या बदलाव आएंगे।