महाकाल पर आज से शीतल जलधारा शुरू, 29 जून तक निरंतर चलेगी शीतल धारा

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मौसम के बदलते ही परंपराओं का स्वरूप भी बदलने लगता है। गर्मी की आहट के साथ ही बाबा महाकाल को शीतलता प्रदान करने की विशेष परंपरा शुरू हो गई है। शुक्रवार से मंदिर में सतत जलधारा अर्पण का क्रम प्रारंभ हुआ, जो अब ज्येष्ठ पूर्णिमा, 29 जून तक निरंतर जारी रहेगा। इस दौरान दिनभर भगवान महाकाल पर शीतल जल प्रवाहित किया जाएगा, ताकि बढ़ती गर्मी के बीच उन्हें ठंडक पहुंचाई जा सके।

मंदिर की परंपरा के अनुसार, यह विशेष अभिषेक हर दिन भस्म आरती के पश्चात शुरू होता है। सुबह लगभग 6 बजे से जलधारा प्रवाहित की जाती है, जो शाम की पूजा तक लगातार चलती रहती है। करीब 11 घंटे तक चलने वाली यह प्रक्रिया श्रद्धा और नियमबद्ध विधि के साथ संपन्न की जाती है। इस दौरान गर्भगृह का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और शांत बना रहता है, जहां निरंतर जल की धारा भगवान के शिवलिंग पर गिरती रहती है।

इस अनुष्ठान की खास बात यह है कि इसमें केवल साधारण जल नहीं, बल्कि देश की प्रमुख पवित्र नदियों का स्मरण कर अभिषेक किया जाता है। 11 मिट्टी के कलशों में गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, सरयू और क्षिप्रा सहित अन्य पवित्र नदियों का आव्हान मंत्रोच्चार के साथ किया जाता है। इन कलशों से निकली जलधारा एक साथ मिलकर भगवान महाकाल पर अर्पित होती है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया को मंदिर की प्राचीन परंपरा ‘गलंतिका’ के माध्यम से निभाया जाता है। रजत अभिषेक पात्र के साथ एक विशेष व्यवस्था बनाई जाती है, जिससे जल की धारा बिना रुके लगातार शिवलिंग पर गिरती रहे। यह परंपरा वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलती है और हर वर्ष श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

इस बार यह अनुष्ठान और भी विशेष हो गया है, क्योंकि अधिक मास के कारण इसकी अवधि बढ़ा दी गई है। पुजारियों के अनुसार अतिरिक्त एक माह तक यह जलधारा अर्पण जारी रहेगा, जिससे भगवान महाकाल को लंबे समय तक शीतलता प्रदान की जाएगी। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए भी यह एक विशेष अवसर है, जब वे इस दुर्लभ और दिव्य परंपरा के साक्षी बन सकते हैं।

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