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शिप्रा नदी का रौद्र रूप: रविवार को नदी का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन ने स्नान पर लगाया प्रतिबंध; 24 घंटे में 64 मिमी बारिश, उज्जैन जिला हुआ तरबतर!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में सावन के महीने ने पहली बार शिप्रा नदी के तेवर बदल दिए हैं। शनिवार रात से लगातार हो रही बारिश का असर अब नदी के जलस्तर पर साफ़ दिखाई देने लगा है। रविवार सुबह नदी का पानी बढ़ते-बढ़ते शहर की छोटी पुलिया के ऊपर से बहने लगा, जहाँ करीब 2 से ढाई फीट तक का बहाव देखा गया।
श्रद्धालुओं के लिहाज़ से यह एक संवेदनशील समय है, क्योंकि श्रावण का रविवार और छुट्टी का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा स्नान के लिए घाटों की ओर पहुँचने लगे। लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला लिया — श्रद्धालुओं के लिए नदी में स्नान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सुरक्षा के लिए अलर्ट मोड पर प्रशासन
घाट क्षेत्रों में भारी भीड़ और जलस्तर के बढ़ते खतरे को देखते हुए नदी किनारे होमगार्ड और एसडीईआरएफ (State Disaster Emergency Response Force) के जवानों को तैनात किया गया है। इन जवानों के पास आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सके।
रामघाट स्थित होमगार्ड चौकी प्रभारी जितेंद्र गौड़ ने बताया कि जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है और बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में स्नान के लिए पहुँच रहे हैं। उन्हें घाटों पर ही रोककर समझाइश दी जा रही है कि वे पानी में न उतरें।
घाटों से नदी की ओर जाने वाले रास्तों पर बेरिकेट्स लगाए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और कोई अप्रिय घटना न हो।
24 घंटे में 64 मिमी बारिश, उज्जैन जिला हुआ तरबतर
कलेक्टर कार्यालय के भू-अभिलेख विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में उज्जैन जिले में औसत 15 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जिसमें उज्जैन तहसील में सबसे अधिक 64 मिमी बारिश हुई है। अन्य तहसीलों का हाल कुछ इस प्रकार रहा:
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महिदपुर – 34 मिमी
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झारडा – 20 मिमी
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तराना – 11.1 मिमी
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घट्टिया – 04 मिमी
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माकडोन – 02 मिमी
1 जून से अब तक जिले में कुल औसत वर्षा 266.2 मिमी तक पहुँच चुकी है। यह आँकड़ा सामान्य से कहीं अधिक है और इसके चलते न सिर्फ नदी नाले उफान पर हैं, बल्कि शहर के निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बन गई है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे घाटों पर तो पहुँच सकते हैं लेकिन नदी में स्नान करने से बचें, क्योंकि जल प्रवाह तेज़ है और गहराई अनुमान से अधिक हो सकती है। सुरक्षा बलों की लगातार गश्त जारी है और स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है।