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महाकाल की नगरी से निकली ऐतिहासिक वैदिक घड़ी अब प्रधानमंत्री कार्यालय में! 100+ वैदिक घड़ियां होंगी तैयार, अब हर प्रतिष्ठित स्थल पर की जाएंगी स्थापित; 30 मार्च को घड़ी का मोबाइल ऐप होगा लॉन्च
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन, महाकाल की नगरी, जहां समय को मापने की प्राचीन परंपरा को एक नया आयाम मिला है। जंतर मंतर में स्थापित देश की पहली वैदिक घड़ी के लोकार्पण के बाद अब यह ऐतिहासिक घड़ी जल्द ही प्रधानमंत्री कार्यालय और नए संसद भवन में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। हाल ही में भोपाल में आयोजित ग्लोबल समिट में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अनोखी घड़ी का लघु स्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया। यह केवल एक घड़ी नहीं, बल्कि भारतीय समय गणना की प्राचीन प्रणाली को पुनर्जीवित करने का एक महायज्ञ है। यही कारण है कि अब इस वैदिक घड़ी को 100 से अधिक प्रतियों में निर्मित कर देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंदिरों और संस्थानों में स्थापित किया जाएगा।
अब तक केवल जंतर मंतर में देखने को मिलने वाली यह अद्भुत घड़ी, अब दीवार घड़ी के रूप में भी उपलब्ध होगी। लोग इसे अपने घर, कार्यालय और संस्थानों में स्थापित कर सकेंगे। इसमें विशेष चिप तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे यह बिजली जाने पर भी स्वतः संचालित होगी और समय कभी नहीं रुकेगा।
विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस घड़ी का डिजिटल स्वरूप भी तैयार किया गया है, जिसका मोबाइल ऐप 30 मार्च, गुड़ी पड़वा के दिन लॉन्च किया जाएगा। इस ऐप और घड़ी को 189 भाषाओं में तैयार किया जा रहा है, जिससे यह भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार का प्रतीक बनेगी।
यह घड़ी केवल समय बताने का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान का एक अद्वितीय उदाहरण है। उज्जैन के विक्रमादित्य शोध पीठ कार्यालय में स्थापित इस घड़ी की सफलता के बाद, इसे जल्द ही अन्य प्रतिष्ठित स्थलों पर भी स्थापित किया जाएगा।