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उज्जैन के इन नेताओं की राजनीति चमकेंंगी या लगेगा ग्रहण
समर्थकों ने कांग्रेस से इस्तीफा तो दिया, लेकिन अभी भाजपा में नहीं हुए शामिल, नई पार्टी ज्वाइन करने को लेकर कर रहे सिंधिया के निर्देश का इंतजार
उज्जैन. पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सहित ज्योतिरादित्य सिंधिया के अन्य कुछ समर्थकों ने कांग्रेस से इस्तीफा तो दे दिया है लेकिन इसके पांच दिन बाद भी वे भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। कारण, प्रदेश की राजनीतिक उठापटक के बीच इन समर्थकों को भाजपा में प्रवेश करवाने का तरीका ही तय नहीं हो पाया है। समर्थक भी निकट भविष्य की नई जिम्मेदारी तय होने से अधिक इस उठापटक के आने वाले परिणाम पर नजरें गढ़ाए हुए हैं। इधर एेसे भी कई सिंधिया समर्थक हैं जिन्होंने अब भी अपने राजनीति पत्ते नहीं खोले हैं।
कांग्रेस से भाजपा में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक दोराहे पर खड़े हो गए हैं। सिंधिया के प्रति निष्ठा दिखाते हुए जिन समर्थकों ने कांग्रेस से घोषित इस्तीफा दिया वे अब सिंधिया के अगले इशारे का इंतजार कर रहे हैं और जिन्होंने इस्तीफे की घोषणा नहीं की वे भी असमंजस के कारण फिलहाल किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सके हैं। एेसे में दोनों ही परिस्थितियां राजनीतिक जुएं के समान हो रही है जिसमें समर्थकों का पॉलिटीकल कैरियल दांव पर लगा है। किसे कितना फायदा होगा, यह अब सिंधिया के राज्य सभा में जाने से ज्यादा वर्तमान प्रदेश सरकार के भविष्य पर टिक गया गया है। यही कारण है कि हर कोई अब पूरे राजनीतिक ड्रामे के अंत का इंतजार कर रहा है।
जो सिंधियाजी तय करेंगे, वैसा ही करेंगे
ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक पूर्व विधायक राजेंद्र भारती होली पर कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं। उनके साथ ही पीसीसी महामंत्री रहे संजय ठाकुर, शहर कार्यकारी अध्यक्ष रहे नारायणसिंह भाटिया ने भी इस्तीफे की घोषणा की थी। इसके अलावा पूर्व पार्षद पूर्व पार्षद दिलीप परमार, किसान नेता गजेंद्र मारोठिया, रितेश जटिया ने भी पार्टी से इस्तीफा देने का कहा था। सिंधिया तो कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं लेनिक समर्थकों ने अभी भाजपा का दामन नहीं थामा है। भारती के अनुसार, वह पहले ही दिन स्पष्ट कर चुके हैं कि जहां सिंधियाजी रहेंगे, वहां वे रहेंगे। भाजपा की सदस्यता कैसे लेना है, कब लेना है यह सब सिंधियाजी के निर्देशानुसार ही होगा।
कुछ कांग्रेस के साथ, कुछ की चुप्पी
सिंधिया के कुछ समर्थकों ने कांग्रेस के साथ रहने का निर्णय लिया है वहीं कुछ की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हुई है। सिंधिया समर्थक पूर्व सांसद सत्यनारायण पंवार ने कांग्रेस में ही रहने का निर्णय लिया है। कुछ दिन से अस्पताल में भर्ती पार्षद बीनू कुशवाह भी कांग्रेस में ही होने की बात कह रहे हैं। सिंधिया समर्थक उमेशसिंह सेंगर का कुछ दिन से मोबाइल बंद था वहीं रविवार को भी उनसे संपर्क करना चाहा लेकिन उन्होंने फोन रिसिव नहीं किया। हालांकि शहर कांग्रेस द्वारा उन्हें निश्कासित कर दिया गया है। सिंधिया समर्थक व भारती के नजदीकी आजम शेख से भी चर्चा करना चाही लेनिक वे उपलब्ध नहीं हुए जिसके कारण उनका मत पता नहीं चला सका।