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नगर निगम के जिम्मेदारों को ही स्वच्छता में रुचि नहीं
स्वच्छता का संदेश देने निकाली साइकिल रैली, पार्षद ही नहीं हुए शामिल, स्वच्छता के कार्यक्रमों में निगम के ही जनप्रतिनिधयों की लगातार दूरी, खानापूर्ति बना आयोजन
उज्जैन. शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन बनाने के लिए शहरवासियों से भागीदारी की आस लगाई जा रही है वहीं नगर निगम के कई जनप्रतिनिधि ही इसमें ठीक से अपना योगदान नहीं दे रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण अंतर्गत निकाली गई साइकिल रैली के भी यही हाल हुए। इसमें निगम के अधिकांश पार्षद और अधिकारी-कर्मचारी ही नदारद थे।
स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत स्वच्छता का संदेश देने के लिए नगर निगम द्वारा रविवार सुबह ८ बजे से साइकिल रैली का आयोजन किया गया था। रैली में महापौर मीना जोनवाल, एमआइसी सदस्य मांगीलाल कड़ेल, उपायुक्त योगेंद्र पटेल, भविष्य खोब्रागड़े सहित गिनती के जनप्रतिनिधि-अधिकारी और जनजागृति के लिए जिम्मेदार एनजीओ के कार्यकर्ता सहित १५-२० आम लोग ही शामिल थे। अधिकांश पार्षद व निगम के अधिकारी-कर्मचारियों ने इसमें भागीदारी नहीं की। एेसे में स्वच्छता जागरुकता के लिए निकाली गई रैली में ५० लोग भी नहीं जुट पाए। क्षीरसागर से शुरू हुई रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए ग्रांड होटल पर समाप्त हुई। बता दें, पूर्व में भी जनजागृति को लेकर हुए इस प्रकार के आयोजनों में निगम के ही जनप्रतिनिधियों ने भाग नहीं लिया था।
जागरुकता के नाम लाखों खर्च, भीड़ जुटती नही
स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर नगर निगम करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। इसमें जनजागृति के लिए भी हर महीने बड़ी राशि खर्च की जाती है। निगम ने इसके लिए दो एजेंसियों को जिम्मा दिया है। एजेंसियों को जनजागृति के लिए शहर में विभिन्न आयोजन करना होते हैं, जिसके एवज में उन्हें निगम राशि भुगतान करता है। इसके बावजूद अधिकांश कार्यक्रम महज खानापूर्ति ही साबित हो रहे हैं। पूर्व निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने निगम की इन सहयोगी संस्थाओं पर एेसी कार्यप्रणाली को लेकर खासी नाराजगी भी जताई थी। रविवार को भी हुए इवेंट में न निगम के अधिकारी-जनप्रतिनिधि शामिल हुए और नहीं शहरवासियों की ठीक से भागीदारी हुई। इससे इवेंट फेल साबित रहा।