- चैत्र मास की पहली जत्रा शुरू, चिंतामण गणेश मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
- चंद्र ग्रहण के बाद धुलेंडी पर रंगों की बरसात, संतों से लेकर युवाओं तक छाया उत्साह
- भक्तों के लिए जरूरी अपडेट: महाकाल मंदिर में बदले आरती के समय, धुलेंडी के बाद लागू नई व्यवस्था!
- महाकाल दरबार में तड़के भस्म आरती: राजा स्वरूप में सजे बाबा, श्रद्धालुओं ने किए अलौकिक दर्शन!
- भस्म आरती में शामिल हुए पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, नंदी हाल में बैठकर किया महाकाल का जाप
प्लॉटों की धोखाधड़ी के मामले में फरार रामसिंह को दो साल बाद पुलिस ने पकड़ा
शहर में खुला घूमने वाला नजर नहीं आता था पुलिस को
इंदौर रोड पर कॉलोनी काटी, सरकारी जमीन पर बेचे प्लॉट
उज्जैन। डेढ दर्जन लोगों से लाखों की धोखाधडी कर दो साल से भी अधिक समय से फरार भाजपा नेता रामसिंह सोलंकी को अब पुलिस ने पकड़ा हैं।
आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी सोंलकी शहर में खुलेआम घूमता रहा। सोशल मीडिया पर भी उसके फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस को वह नजर नहीं आता था।
आखिरकार वह पुलिस के हाथ आ गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है या वह पुलिस के समक्ष पेश हुआ है यह अलग सवाल तो है। दरअसल ऐसा सवाल इसलिए क्योंकि पुलिस इंदौर रोड पर कॉलोनी काटने और सरकारी जमीन पर प्लाट बेचने वाले रामसिंह सोलंकी को नहीं पकडऩे के लिए कुछ अधिक की उदार बनी हुई थी।
पुलिस ने बताया कि रामसिंह सोलंकी निवासी अंबोदिया भाजपा नेता है और उसने अपने साथी दीपक नोकवाल निवासी महानंदा नगर,मोहनलाल सोलंकी के साथ मिलकर इंदौर रोड पर श्रीराम विहार कालोनी काटी। रामसिंह ने सरकारी जमीन पर काटकर लोगों को बेच दिये।
4 लोगों ने 36 लाख रूपये की धोखाधडी का केस थाने में दर्ज कराया। पुलिस ने मामले में दीपक नोकवाल और मोहनलाल सोलंकी को पूर्व में गिरफ्तार कर लिया। रामसिंह सोलंकी निवासी अंबोदिया तभी से फरार था।
इसके बाद 12 लोगों ने नीलगंगा में तीनों के खिलाफ सरकारी जमीन पर प्लाट बेचने का प्रकरण दर्ज कराया था। जिसमें भी रामसिंह सोलंकी फरार था। कल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और आज कोर्ट में पेश कर रिमाण्ड मांगा जायेगा।
नगर निगम ने तोड दिये थे मकान: पुलिस ने बताया कि श्रीराम कालोनी के पास लगी सरकारी जमीन पर रामसिंह सोलंकी और उसके साथियों द्वारा प्लाट काटकर लोगों को बेचे गये जिन पर लोगों ने मकान भी बना लिये थे। जानकारी मिलने के बाद नगर निगम ने उक्त मकानों को तोड दिया था।