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भगवान महाकाल के सेनापति कालभैरव की सवारी धूमधाम से निकाली गई कलेक्टर ने विधिवत पूजन-अर्चन कर सवारी को रवाना किया
भगवान श्री महाकालेश्वर के सेनापति श्री कालभैरव की अनादिकाल से विशेष अवसरों पर वर्ष में दो बार सवारी निकाली जाती है। सवारी के पूर्व श्री कालभैरव का विधिवत पूजन-अर्चन कर विभिन्न मार्गों से निकाली जाती है। वर्ष में दो बार क्रमश: डोल ग्यारस एवं कार्तिक पूर्णिमा के आठ दिन बाद श्री कालभैरव जयन्ती पर सवारी निकाली जाती है। डोल ग्यारस के अवसर पर श्री कालभैरव की सवारी कलेक्टर संकेत भोंडवे ने परिवार सहित विधिवत पूजन-अर्चन कर कांधा देकर सवारी को रवाना किया।
श्री कालभैरव की सवारी जैसे ही कालभैरव मन्दिर के मुख्य द्वार पर पहुंची तोपचियों ने तोप छोड़कर सवारी की सूचना आमजन को दी। सवारी के आगे भैरवगढ़ जेल के सशस्त्र पुलिस जवान सहित घुड़सवार, बग्घियां, बैण्ड-बाजे और भक्तगण सवारी में चल रहे थे। सवारी श्री कालभैरव मन्दिर से जेल के मुख्य द्वार पहुंचने पर जेल के अधिकारी आदि ने सवारी का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद सवारी जेल तिराहा, भैरवगढ़ के नया बाजार, पुराना नाका, माणक चौक होते हुए सिद्धवट पहुंची। यहां पर मां भगवती शिप्रा की आरती की गई। इसके बाद भगवान सिद्धनाथ का पूजन-अर्चन कर आरती की गई। तत्पश्चात सवारी सिद्धवट से ब्रजपुरा होते हुए पुन: कालभैरव मन्दिर पहुंची।
मन्दिर पहुंचने पर भगवान श्री कालभैरव का मन्दिर में पूजन-अर्चन पश्चात प्रसाद वितरण कर सवारी का समापन किया गया। श्री कालभैरव पर चांदी के आभूषण धारण कराये जाते हैं, उसके बाद प्रशासनिक अधिकारी द्वारा विधिवत सवारी के पूर्व पूजन-अर्चन कर आरती की जाती है। सवारी में पालकी में भगवान कालभैरव का मुखौटा विराजमान होता है। सवारी में हजारों भक्त भगवान कालभैरव का दर्शन लाभ लेते हैं।