- 8 साल बाद जेष्ठ में अधिकमास का दुर्लभ संयोग: 17 मई से 15 जून तक रहेंगे मांगलिक कार्य बंद, धार्मिक साधना, दान-पुण्य और तीर्थ के लिए श्रेष्ठ समय
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: स्वस्ति वाचन के बाद खुले पट, पंचामृत से अभिषेक; शेषनाग मुकुट में दिए भगवान ने दर्शन
- महाकाल मंदिर में गुरुवार को दो राज्यों के मंत्री पहुंचे: भस्म आरती में गोवा के कैबिनेट मंत्री, दद्योदक आरती में दिल्ली के गृह मंत्री ने किए दर्शन
- फूलों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी: CM ने उज्जैन में फ्लोरीकल्चर सेंटर बनाने का किया ऐलान, बोले- कम जमीन में ज्यादा आय का माध्यम बनेंगी उद्यानिकी फसलें
- महाकाल मंदिर में नई सुविधा: अन्न क्षेत्र में अब ऑनलाइन होगा दान, वेबसाइट के जरिए कहीं से भी कर सकेंगे दान
महाकाल की सवारी वेबसाइट पर नहीं देख पाए श्रद्धालु:भक्त हुए मायूस,दुनिया भर के श्रद्धालु सवारी के दर्शन का लाभ लेते थे
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भादौ माह में निकलने वाली सवारी को वेबसाइट के लाइव दर्शन के माध्यम से दुनिया भर के श्रद्धालु दर्शन लाभ लेते थे। इस बार वेबसाइट में सवारी दर्शन की सुविधा नही होने से दुनिया भर के बाबा महाकाल के भक्तों को मायूसी रही। हालांकि मंदिर समिति ने फेसबुक से सवारी के लाइव दर्शन की व्यवस्था की थी।
श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति की अपनी अधिकृत वेबसाइट है। इसके माध्यम से श्रद्धालु भगवान महाकाल के लाइव दर्शन करने के साथ ही भस्म आरती बुकिंग, शीघ्र दर्शन बुकिंग करने के साथ ही प्रसाद भी ऑनलाइन मंगवाते है। मंदिर की अधिकृत वेबसाइट होने से दुनिया भर के श्रद्धालु इसका उपयोग करते है। इस बार बाबा महाकाल की श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली सवारी के लाइव दर्शन इस वेबसाइट से नही हो पा रहे है।
वेबसाइट में टेक्नीकल परेशानी
मंदिर के सूत्रों का कहना है वेबसाइट से सवारी के लाइव दर्शन नही हो पाने के कुछ टेक्नीकल कारण है। वहीं पहली सवारी के लिए भी मंदिर समिति की ओर से फेसबुक पर लाइव दर्शन कराने का इंतजाम किया है। इसके बाद भी जो लोग फेसबुक से नही जुड़े है वे वेबसाइट के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने से दर्शन लाभ ले लेते थे। इस बार की व्यवस्था बदलने से सवारी दर्शन नही होने से श्रद्धालु मायूस हुए है। अधिकारियों का कहना है कि वेबसाइट पर लाइव सवारी दर्शन को लेकर चर्चा कर सुविधा देने का प्रयास करेंगे। बता दें कि बीते दो वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को दर्शन करने आने की अनुमति नही थी। उस दौरान लाइव दर्शन ही एक मात्र विकल्प था।