- उज्जैन में तपिश का प्रकोप: 40-41°C पर अटका पारा, अगले 4 दिन में और बढ़ेगी गर्मी; स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीट मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर सख्ती: मुख्य सचिव ने कहा—समय से पहले पूरे हों काम, बारिश से पहले बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें; मेडिसिटी, सड़क और पुल निर्माण की भी समीक्षा की
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद रजत चंद्र-त्रिशूल से सजा बाबा का दिव्य रूप, गूंजे जयकारे
- CM मोहन यादव के विजन को रफ्तार: विक्रम विश्वविद्यालय ने शुरू किया अभियान, फार्मा कंपनियों को जोड़ने और स्टूडेंट्स को स्किल्ड बनाने पर फोकस
- सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज: रेल से आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था पर फोकस, अधिकारियों ने किया स्टेशनों का निरीक्षण
मोदी के लिए महाकाल मंदिर में जाप
उज्जैन। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन दुनियाभर से लोगों का आना सामान्य बात है लेकिन दिल्ली के एक पंडित का हर माह निश्चित दिन भस्मारती में आना लोगों में जिज्ञासा का कारण बना हुआ है। खास बात यह है कि इनका इंतजाम भाजपा के दिग्गज नेता गोपनीय तरीके से करवाते हैं जिससे पंडितजी मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनवाने के लिए जाप कर सकें।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जुलाई 2018 से दिल्ली से श्रीकांत तिवारी नामक पंडित हर माह एक दिन भस्मारती में शामिल होने के लिए आते हैं। वे आरती के दौरान नंदी हॉल में बैठकर जाप करते हैं। हाल ही में वे मार्च माह में महाशिवरात्रि के दौरान आए थे। भस्मारती में अनुमति के लिए मंदिर के प्रोटोकाल अधिकारी को कलेक्टर कार्यालय से ही निर्देश दिए आते हैं। सूत्रों की मानें तो पं. तिवारी के लिए पीएमओ, अमित शाह के खास लोगों के फोन आते हंै।
यही प्रदेश में भाजपा के शासनकाल में मुख्यमंत्री निवास से भी कलेक्टर को निर्देशित किया जाता रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई भी अधिकारी या संबंधित नेता खुलकर कुछ भी बोलने से बचता रहा।
स्थानीय नेता अनभिज्ञ
सूत्रों की मानें तो जाप गोपनीय तरीके से करवाया जा रहा है इसलिए स्थानीय नेताओं को इससे दूर रखा गया है। यही वजह है कि पं. तिवारी पूजा से एक दिन पहले रात में हवाई जहाज से इंदौर आते हंै। वहां से विशेष कार से आकर पूजा के बाद बिना किसी से मिले चले जाते हैं। अगली बार कब आएंगे यह भी किसी को जानकारी नहीं होती है।
मोदी की महाकाल में आस्था
सर्वविदित है मोदी वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से सभा को संबोधित करने आए थे। उनके प्रोग्राम में महाकाल मंदिर जाना शामिल नहीं था लेकिन वे दर्शन के लिए अड़ गए थे। इंटेलिजेंसी ने इसमें उन्हें खतरा बताया था। बावजूद अधिकारियों की सलाह नहीं मानते हुए महाकाल गए थे। कुछ समय बाद इसी क्षेत्र से सिमी सदस्य विस्फोटक के साथ पकड़ाए थे।